पठानकोट/कांगड़ा:
हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान, कांगड़ा घाटी रेलवे (Kangra Valley Railway) की शान माने जाने वाले ऐतिहासिक भाप इंजन स्टीम लोकोमोटिव जेडबी-66 (ZB-66) को एक बार फिर नया जीवन मिल गया है।
पर्यटकों और रेलप्रेमियों के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए इस धरोहर इंजन को हरियाणा के रेवाड़ी हेरिटेज शेड से वापस पठानकोट लाया गया है। आवश्यक रखरखाव और तकनीकी परीक्षण (Technical Testing) पूरा होने के बाद यह इंजन एक बार फिर धुआं उड़ाते हुए कांगड़ा घाटी की खूबसूरत वादियों में दौड़ता नजर आएगा।
8 जून को पहुंचा पठानकोट, पर्यटन को मिलेंगे नए पंख
उत्तर रेलवे के जम्मू मंडल से मिली जानकारी के मुताबिक, 8 जून को इस धरोहर इंजन को सुरक्षित पठानकोट लाया गया। इसके दोबारा शुरू होने से न केवल हिमाचल प्रदेश में हेरिटेज टूरिज्म (धरोहर पर्यटन) को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युवा पीढ़ी को भी भारतीय रेल के गौरवशाली और जीवंत इतिहास को करीब से देखने का मौका मिलेगा।
ब्रिटेन में हुआ था निर्माण, अमृतसर में मिला 'पुनर्जन्म'
1952 में हुआ था निर्माण: इस ऐतिहासिक 'नैरो गेज' इंजन का निर्माण वर्ष 1952 में ब्रिटेन के स्टाफोर्ड स्थित डब्ल्यू.जी डाल्बी लिमिटेड द्वारा किया गया था। 2-6-2टी व्हील व्यवस्था वाला यह इंजन दशकों तक कांगड़ा घाटी की पहचान रहा है।
2012 में मंडराया था संकट: लगातार चलने के कारण साल 2012 तक इस इंजन के बॉयलर, टेंडर, अंडर फ्रेम और ड्राइवर कैबिन को भारी नुकसान पहुंचा था, जिससे इसके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा था।
अमृतसर वर्कशॉप का कमाल: भारतीय रेलवे ने इसे इतिहास के पन्नों में खोने नहीं दिया। अमृतसर वर्कशॉप के इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों ने सालों की कड़ी मेहनत के बाद मार्च 2017 में इसे सफलतापूर्वक पुनर्जीवित (Restore) किया।
रेवाड़ी शेड में देखभाल: साल 2023 में इसे विशेष देखभाल और रखरखाव के लिए रेवाड़ी हेरिटेज शेड भेजा गया था, जहाँ से अब इसकी पठानकोट वापसी हुई है।
पर्यटकों और स्कूली बच्चों के लिए रहा है खास
पुनर्जीवित होने के बाद से यह इंजन कई यादगार यात्राओं का गवाह रहा है:
नवंबर 2018: ब्रिटेन से आए विदेशी पर्यटकों के लिए पालमपुर से बैजनाथ-पपरोला के बीच एक विशेष चार्टर्ड ट्रेन चलाई गई थी।
वर्ष 2019: स्कूली बच्चों को रेलवे की विरासत से रूबरू कराने के लिए इस स्टीम इंजन से विशेष ट्रेनें संचालित की गई थीं।
तकनीकी खासियतें: क्यों बेहद खास है स्टीम लोको जेडबी-66?
इस ऐतिहासिक इंजन की तकनीकी क्षमताएं आज भी हैरान करने वाली हैं:
विशेषता लंबाई (इंजन)26 फीट 7 इंच, कुल लंबाई (टेंडर सहित) 42 फीट 7 इंच, कुल वजन 43 टन, ट्रैक्शन क्षमता (खींचने की क्षमता) 8,000 पाउंड, कोयला क्षमता 3.5 टन ,पानी की क्षमता लगभग 3,000 लीटर अधिकतम गति 30 किलोमीटर प्रति घंटा ब्रेक प्रणाली वैक्यूम ब्रेक सिस्टम
रेलवे अधिकारियों का कहना है: यह इंजन सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे के स्वर्णिम काल का एक जीवंत प्रतीक है। इसकी सीटी की आवाज और भाप के गुबार आज भी लोगों को पुरानी यादों में ले जाते हैं। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक जल्द ही फिर से इस अनोखे रोमांच का आनंद ले सकेंगे।