ज्वालामुखी (कांगड़ा)।
हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के तहत आने वाले सिविल अस्पताल ज्वालामुखी से स्वास्थ्य विभाग को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ इलाज के लिए भर्ती मरीजों को नाश्ते में फफूंद (Fungus) लगी हुई ब्रेड परोस दी गई।
इस घटना का वीडियो इंटरनेट मीडिया (सोशल मीडिया) पर वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, वहीं मरीजों और उनके तीमारदारों में भारी आक्रोश है।
सतर्क मरीज ने बनाया वीडियो, खुली दावों की पोल
जानकारी के अनुसार, अस्पताल में भर्ती एक सजग युवती को सुबह नाश्ते में दी गई ब्रेड की गुणवत्ता पर संदेह हुआ। जब उसने पैकेट को ध्यान से देखा, तो ब्रेड के ऊपर स्पष्ट रूप से हरी और काली फफूंद जमी हुई थी।
युवती ने तुरंत इसका वीडियो बना लिया, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो गया। वीडियो वायरल होते ही पूरे क्षेत्र में अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं और स्वच्छता को लेकर चिंता व्यक्त की जाने लगी है।
तीमारदारों का आरोप: "लंबे समय से मिल रहा घटिया खाना"
अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके तीमारदारों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यहाँ परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता लंबे समय से संतोषजनक नहीं रही है। लेकिन इस बार बीमार मरीजों को फफूंद लगी ब्रेड देना उनके जीवन के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ इस तरह की लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और इस मामले के दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रशासन में हड़कंप, BMO ने ठेकेदार से मांगा जवाब
मामला तूल पकड़ते ही अस्पताल प्रशासन तुरंत हरकत में आया। बीएमओ (BMO) ज्वालामुखी डॉ. पवन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने भोजन की आपूर्ति करने वाले संबंधित ठेकेदार को तत्काल प्रभाव से कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
बीएमओ डॉ. पवन ने मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा मरीजों को स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस तरह की कोताही को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले की गहनता से जांच के निर्देश दे दिए गए हैं और रिपोर्ट आते ही दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
उठते कुछ गंभीर सवाल
एक तरफ जहां सरकार सरकारी अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ बीमार मरीजों को ऐसा दूषित खाना परोसा जाना यह दर्शाता है कि धरातल पर निरीक्षण (Inspection) की भारी कमी है। अब देखना यह होगा कि अस्पताल प्रशासन इस मामले में ठेकेदार पर क्या कार्रवाई करता है, ताकि भविष्य में किसी मरीज की जान जोखिम में न पड़े।