मंडी:
हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले मंडी नगर की प्राचीन धरोहरों, कला और इतिहास को सहेजने के लिए एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत हुई है। सरदार पटेल विश्वविद्यालय (SPU) मंडी और जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत मंडी नगर के ऐतिहासिक एवं पुरातात्त्विक स्थलों के व्यापक सर्वेक्षण का आगाज
हो गया है। विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य ललित कुमार अवस्थी ने त्रिलोकनाथ मंदिर परिसर से इस विशेष सर्वेक्षण कार्य का शुभारम्भ किया।
"भावी पीढ़ियों के लिए इतिहास का वैज्ञानिक अध्ययन व संरक्षण जरूरी"
इस अवसर पर कुलपति आचार्य ललित कुमार अवस्थी ने धरोहरों के दस्तावेजीकरण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा:
वैज्ञानिक प्रलेखन की आवश्यकता: इतिहास का वैज्ञानिक अध्ययन, संरक्षण और प्रलेखन (Documentation) हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक और अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
सांस्कृतिक पहचान होगी मजबूत: मंडी नगर की समृद्ध सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण न केवल शोध कार्यों (Research) को नई दिशा देगा, बल्कि क्षेत्र की वैश्विक पहचान को भी सुदृढ़ करेगा।
प्राचीन जल स्रोतों से लेकर राजमहल और दुर्लभ सिक्का संग्रहालय का सर्वेक्षण
ग्वालियर के वरिष्ठ इतिहासविद् एवं पुरावेत्ता प्रो. शांतिदेव सिसोदिया के नेतृत्व में यह सर्वेक्षण दल मंडी के विभिन्न प्राचीन स्थलों का विस्तृत अध्ययन कर रहा है। प्रो. सिसोदिया ने कहा कि मंडी नगर अपनी प्राचीन मंदिर परम्परा, बेजोड़ स्थापत्य कला तथा सांस्कृतिक विविधता के कारण विशेष महत्व रखता है।
सर्वेक्षण के तहत इन प्रमुख स्थलों का किया जा रहा है अध्ययन:
ऐतिहासिक मंदिर: त्रिलोकनाथ मंदिर, पंचवक्त्र महादेव मंदिर, भूतनाथ मंदिर और अनूठी स्थापत्य कला का प्रतीक अर्द्धनारीश्वर मंदिर।
शाही विरासत: राजमहल परिसर का विस्तृत ऐतिहासिक अध्ययन।
प्राचीन जल प्रबंधन: नगर के प्राचीन जल स्रोतों एवं पारम्परिक जल प्रबंधन संरचनाओं (बावड़ियों और चश्मों) का विशेष सर्वेक्षण।
दुर्लभ धरोहर: इतिहासकार डॉ. कमल प्यासा के दुर्लभ सिक्का संग्रहालय का विशेष अवलोकन।
शोधार्थियों और इतिहासकारों के लिए खुलेगा ज्ञान का नया द्वार
इतिहास विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि यह संयुक्त सर्वेक्षण मंडी नगर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक तथा स्थापत्य धरोहरों के समग्र दस्तावेजीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इस गहन अध्ययन से मंडी की समृद्ध विरासत से संबंधित कई ऐसे महत्वपूर्ण तथ्य और रहस्य प्रकाश में आएंगे, जो भविष्य के शोधार्थियों के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।
सर्वेक्षण दल में ये रहे शामिल
इस महत्वपूर्ण कार्य में जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर से शोधार्थी राहुल बरैया, सुमन प्रिय और चांदनी शामिल हैं। वहीं सरदार पटेल विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग से डॉ.
राकेश कुमार शर्मा, डॉ. रामपाल, राजेश शर्मा के साथ शोधार्थी वेद, राहुल, राजू, डोल्मा, सूर्य प्रकाश और सुरेखा सक्रिय रूप से अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। इस मौके पर इंटेक मंडी चैप्टर के सह संयोजक अनिल शर्मा और विनोद वहल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।