मण्डी। सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मण्डी तथा जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत मण्डी नगर के ऐतिहासिक एवं पुरातात्त्विक स्थलों के व्यापक सर्वेक्षण कार्य का शुभारम्भ त्रिलोकनाथ मंदिर परिसर से किया गया।
विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य ललित कुमार अवस्थी ने इस अवसर पर कहा कि इतिहास का वैज्ञानिक अध्ययन, संरक्षण और प्रलेखन भावी पीढ़ियों के लिए अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने कहा कि मण्डी की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण शोध कार्यों को नई दिशा देने के साथ-साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी सुदृढ़ करेगा।
यह सर्वेक्षण जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के वरिष्ठ इतिहासविद् एवं पुरावेत्ता प्रो. शांतिदेव सिसोदिया के नेतृत्व में किया जा रहा है। सर्वेक्षण दल में दोनों विश्वविद्यालयों के शोधार्थी और इतिहास विभाग के विशेषज्ञ शामिल हैं।
इतिहास विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि यह पहल मण्डी नगर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक तथा स्थापत्य धरोहरों के समग्र अध्ययन और दस्तावेजीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि इस अध्ययन से मण्डी की विरासत से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आएंगे, जो भविष्य के शोधार्थियों और इतिहासकारों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे।
सर्वेक्षण के दौरान दल ने मण्डी नगर के प्रमुख ऐतिहासिक एवं पुरातात्त्विक स्थलों का भ्रमण कर विस्तृत अध्ययन किया। इस क्रम में इतिहासकार डॉ. कमल प्यासा के दुर्लभ सिक्का संग्रहालय का अवलोकन किया गया।
इसके अलावा त्रिलोकनाथ मंदिर, पंचवक्त्र महादेव मंदिर, भूतनाथ मंदिर, अर्द्धनारीश्वर मंदिर, राजमहल परिसर तथा नगर के प्राचीन जल स्रोतों और पारंपरिक जल प्रबंधन संरचनाओं का भी सर्वेक्षण किया गया। इस अवसर पर इंटेक मण्डी चैप्टर के सह-संयोजक अनिल शर्मा, विनोद वहल, विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।