धर्मशाला I
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में बुधवार को उस समय बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ आ गया, जब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आगामी पंचायत चुनावों को लेकर एक अप्रत्याशित ऐलान किया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस पार्टी पंचायत चुनावों में अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी और विधायक भी इन चुनावों से दूरी बनाएंगे। इस फैसले के सार्वजनिक होते ही विपक्षी दल भाजपा ने इसे कांग्रेस का 'मैदान छोड़ भागना' करार दिया है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपने सभी विधायकों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि वे पंचायत चुनावों में किसी भी स्तर पर भागीदारी न करें। गौरतलब है कि इससे पहले सरकार पर पंचायत चुनाव टालने के आरोप भी लगते रहे हैं। आरक्षण रोस्टर में छेड़छाड़ और न्यायपालिका के हस्तक्षेप के बाद अब सीधे तौर पर चुनाव से दूरी बनाने के फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
भाजपा के प्रदेश मीडिया सह-प्रभारी विश्व चक्षु ने सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे कांग्रेस की नैतिक हार बताया है। उन्होंने कहा पंचायत लोकतंत्र की बुनियादी इकाई है।
जो पार्टी अपनी नींव को मजबूत करने के बजाय मैदान छोड़कर भाग रही हो, वह भविष्य में ऊपर की राजनीति कैसे टिका पाएगी? मुख्यमंत्री को जनता के बीच जाने से डर लग रहा है, इसीलिए उन्होंने बिना लड़े ही हथियार डाल दिए हैं।
विश्व चक्षु ने आरोप लगाया कि सीएम सुक्खू ने पहले जनता की अदालत में जाने से बचने के लिए चुनाव टालने के हर संभव प्रयास किए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के आदेशों के बावजूद आरक्षण रोस्टर के साथ मनमर्जी की गई, जिस पर अदालत ने सख्ती दिखाई। अब जब कोई रास्ता नहीं बचा, तो हार की फजीहत से बचने के लिए कांग्रेस ने चुनाव से दूरी बनाने का "शॉर्टकट" अपनाया है।
विपक्ष का तर्क है कि पंचायत चुनावों के नतीजे अक्सर जनता के मिजाज का आईना होते हैं। कांग्रेस का यह कदम संकेत देता है कि उसे अपनी संभावित हार का पहले से ही अंदेशा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या कांग्रेस का यह निर्णय केवल पंचायत स्तर तक सीमित है? क्या आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी पार्टी इसी "रक्षात्मक" रणनीति पर चलेगी?
भले ही कांग्रेस इसे एक नई रणनीतिक दूरी बता रही हो, लेकिन भाजपा ने इसे 'राजनीतिक पलायन' का नाम देकर बड़ा मुद्दा बना लिया है। आने वाले समय में हिमाचल की सियासत में यह फैसला कांग्रेस के लिए आत्मघाती साबित होता है या मास्टरस्ट्रोक, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल सुक्खू सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है।