ऊना I
हिमाचल प्रदेश में अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना "सिफारिश" का नहीं बल्कि "हुनर" का खेल होगा। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने आज ऊना में राज्य के पहले ऑटोमैटिक ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक (ADTT) का उद्घाटन किया।
लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह आधुनिक ट्रैक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है, जो प्रदेश की परिवहन व्यवस्था में पारदर्शिता का नया युग लेकर आएगा।
उद्घाटन के बाद एक अनूठे अंदाज में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने खुद कार की स्टीयरिंग थामी और पूरे ट्रैक का ट्रायल लिया। उन्होंने सेंसर और कैमरों की संवेदनशीलता को बारीकी से परखा। इस दौरान उन्होंने परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
उपमुख्यमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि अब ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होगी। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं टेस्ट का परिणाम सेंसर और सीसीटीवी कैमरों द्वारा निर्धारित होगा, जिससे मानवीय हस्तक्षेप या भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।
आवेदक घर बैठे अपनी सुविधा के अनुसार टेस्ट के लिए समय (स्लॉट) बुक कर सकेंगे। ट्रैक पर '8' बनाना, रिवर्स पार्किंग और चढ़ाई जैसे कठिन मानकों पर खरा उतरने वाले कुशल चालकों को ही लाइसेंस मिलेगा, जिससे सड़क हादसों में कमी आएगी।
यह तकनीक भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएगी। अब केवल वही व्यक्ति सड़क पर गाड़ी लेकर उतरेगा जिसे वास्तव में गाड़ी चलानी आती है। ऊना का यह मॉडल पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बनेगा। — मुकेश अग्निहोत्री, उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री
मुकेश अग्निहोत्री ने इस अवसर पर बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि ऊना की सफलता के बाद प्रदेश के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों में 5 और ऑटोमैटिक ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए परिवहन विभाग के अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की।
यह ट्रैक पूरी तरह अत्याधुनिक सेंसर, सीसीटीवी कैमरों और ऑटोमेटेड सिग्नलिंग सिस्टम से लैस है। जैसे ही चालक वाहन ट्रैक पर उतारता है, उसके हर मूवमेंट को सेंसर रिकॉर्ड करते हैं। यदि टायर लाइन से बाहर जाता है या चालक तय मानकों (जैसे समय सीमा या पार्किंग) में विफल रहता है, तो कंप्यूटर तुरंत परिणाम घोषित कर देता है।