शिमला।
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के भीतर अंदरूनी कलह और असंतोष की लहर अब खुलकर सतह पर आ गई है। गुरुवार को राजधानी शिमला के राजीव भवन में आयोजित प्रदेश कांग्रेस राजनीतिक मामलों की कमेटी (PAC) की बैठक में पूर्व मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने अपनी ही सरकार के कामकाज और कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए।
प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल की उपस्थिति में हुई इस बैठक में नेताओं ने 'शक्तियों के केंद्रीकरण' और कार्यकर्ताओं की अनदेखी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया।
बैठक में सबसे गंभीर आरोप जिला परिषद प्रत्याशियों के चयन को लेकर लगे। नेताओं का कहना था कि उम्मीदवारों का चयन संगठन के बजाय सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से तय हो रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर पार्टी कैडर की भूमिका नगण्य हो गई है।
पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर, पूर्व विधायक बंबर ठाकुर और सराज के नेता चेतराम ने दो-टूक कहा कि मंत्रियों की सिफारिशों पर भी काम नहीं हो रहे हैं, जबकि भाजपा नेता अपने काम आसानी से करवा रहे हैं।
मीडिया से बातचीत में वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर ने स्पष्ट कहा कि सरकार में मंत्रियों को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने शिक्षा विभाग का उदाहरण देते हुए कहा कुछ अधिकारियों के स्तर पर गड़बड़ियां हो रही हैं।
कांग्रेस पदाधिकारियों और उनके परिजनों के तबादले बिना कारण दूरदराज क्षेत्रों में किए जा रहे हैं। मैंने शिक्षा मंत्री से बात की थी, लेकिन फाइलें लंबे समय तक मुख्यमंत्री कार्यालय में लंबित रहीं।
नेताओं ने आरोप लगाया कि विकास कार्य और सरकारी फंड कुछ सीमित विधानसभा क्षेत्रों तक ही सिमट कर रह गए हैं। राजधानी के नेताओं ने सरकारी कार्यालयों को शिमला से बाहर स्थानांतरित करने का कड़ा विरोध किया। जिला अध्यक्षों ने नाराजगी जताई कि ब्लॉक स्तर पर टीमों का गठन न होने से संगठन पंगु हो रहा है।
वरिष्ठ नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और संगठन के बीच यही खाई बनी रही, तो आगामी पंचायत, नगर निकाय और डेढ़ साल बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी को भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। कौल सिंह ने पंचायत चुनावों को 'सेमीफाइनल' करार देते हुए जल्द से जल्द संगठनात्मक ढांचे को दुरुस्त करने की मांग की।
असंतोष को बढ़ता देख प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने मंत्रियों और संगठन को तालमेल के साथ काम करने की हिदायत दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की छवि पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए और मुख्यमंत्री को कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर संज्ञान लेना होगा।