शिमला।
हिमाचल प्रदेश में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं के पहिये आज से थम गए हैं। राज्यस्तरीय एंबुलेंस कांट्रेक्ट यूनियन के आह्वान पर प्रदेश भर के एंबुलेंस कर्मचारी 5 अप्रैल से 11 अप्रैल तक सात दिवसीय हड़ताल पर चले गए हैं।
इस हड़ताल के कारण दूरदराज के क्षेत्रों में मरीजों को अस्पताल पहुँचाने और आपातकालीन स्थिति में समय पर सहायता मिलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हड़ताल का मुख्य कारण
एंबुलेंस यूनियन का आरोप है कि कंपनी और सरकार उनकी मांगों की लगातार अनदेखी कर रही है। हड़ताल के प्रमुख कारण यूनियन के अनुसार, कंपनी ने लगभग 50 कर्मचारियों को बिना किसी ठोस कारण के नौकरी से निकाल दिया है, जिन्हें बहाल करने की मांग की जा रही है।
लंबे समय से कर्मचारी न्यूनतम वेतन (करीब ₹18,000) और समय पर भुगतान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी भी उन्हें बहुत कम वेतन पर 12-12 घंटे काम करना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने प्रबंधन पर मानसिक और प्रशासनिक प्रताड़ना के भी आरोप लगाए हैं।
मरीजों पर असर और वैकल्पिक व्यवस्था
हड़ताल शुरू होने से गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए संकट पैदा हो गया है। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में जहाँ निजी वाहन मिलना मुश्किल है, वहाँ 102 (जननी एक्सप्रेस) और 108 सेवाओं के ठप होने से लोग परेशान हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को संभालने के लिए अन्य सरकारी वाहनों और निजी ड्राइवरों के माध्यम से सेवाएं जारी रखने का दावा किया है, लेकिन धरातल पर सेवाएं बुरी तरह प्रभावित दिख रही हैं।
हमने 14 दिन पहले ही सरकार को नोटिस दे दिया था, लेकिन बातचीत के लिए कोई पहल नहीं की गई। मजबूरी में हमें यह कदम उठाना पड़ा है। जब तक हमारे साथियों को वापस काम पर नहीं लिया जाता और वेतन विसंगतियां दूर नहीं होतीं, यह विरोध जारी रहेगा। — बालकराम, महासचिव, एंबुलेंस यूनियन।