सोलन।
संकट मोचन हनुमान के जन्मोत्सव 'हनुमान जयंती' के पावन अवसर पर आज जिला सोलन में श्रद्धा, अटूट विश्वास और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह की पहली किरण के साथ ही शहर के तमाम हनुमान मंदिर 'जय श्रीराम' और 'जय बजरंगबली' के जयकारों से गुंजायमान हो उठे।
मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब
सुबह से ही मंदिरों के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। भक्तों ने पूरी आस्था के साथ वीर हनुमान को चमेली का तेल, सिंदूर और चोला अर्पित किया। वातावरण को और भी पावन बनाने के लिए मंदिरों में विशेष भजन-कीर्तन और सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।
प्रमुख आकर्षण और प्रसाद:
विशेष श्रृंगार: भगवान हनुमान की मूर्तियों का फूलों और सुंदर वस्त्रों से भव्य श्रृंगार किया गया।
महाभोग: श्रद्धालुओं के बीच बूंदी, बेसन के लड्डू, चने और फलों का प्रसाद वितरित किया गया।
भक्तिमय माहौल: पूरा सोलन शहर भगवा ध्वजों और आध्यात्मिक भजनों से सराबोर नजर आया।
चिरंजीवी हनुमान का आशीर्वाद
मंदिर के पुजारी पंडित सुभाष शर्मा ने पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा हनुमान जयंती हिंदू धर्म का वह विशेष स्तंभ है, जो हमें सेवा और समर्पण की शक्ति सिखाता है। हनुमान जी कलयुग के जाग्रत देवता हैं और जो भी भक्त सच्चे मन से उनकी शरण में आता है, उसके सभी संकट दूर हो जाते हैं।
श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि हनुमान जी बुद्धि, बल और ज्ञान के प्रतीक हैं। त्रेता युग से ही वे प्रभु श्रीराम के अनन्य भक्त रहे हैं और मान्यता है कि वे 'चिरंजीवी' हैं, जो आज भी अदृश्य रूप में अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।
सुख-समृद्धि की कामना
दिनभर चले इन धार्मिक आयोजनों में लोगों ने न केवल अपने लिए, बल्कि पूरे प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि व शांति की कामना की। मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं का कहना था कि यहाँ आकर मिलने वाली आत्मिक शांति अनमोल है। देर शाम तक मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और हर कोई इस उत्सव का हिस्सा बनकर निहाल नजर आया।