पटड़ीघाट।
उपमंडल सरकाघाट के अंतर्गत राजकीय प्राथमिक पाठशाला बस्सी के प्रांगण में बुधवार को भारी मात्रा में एक्सपायर्ड दवाइयां खुले में फेंकी हुई पाई गईं। स्कूल जैसे संवेदनशील स्थान पर दवाइयों के इस तरह ढेर लगे होना न केवल प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि यहाँ पढ़ने वाले छोटे बच्चों के जीवन के साथ भी खिलवाड़ है।
लापरवाही का बड़ा प्रमाण
हैरानी की बात यह है कि इन दवाइयों के ढेर में ऐसी दवाएं भी शामिल हैं, जिनकी एक्सपायरी डेट अप्रैल 2026 तक है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि उपयोग के योग्य दवाओं को कूड़े के ढेर में क्यों फेंका गया? स्थानीय ग्रामीणों ने स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं।
छोटे बच्चे अक्सर खेल-खेल में इन दवाओं को उठा सकते हैं या खा सकते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है। चिकित्सा अपशिष्ट (Medical Waste) के निस्तारण के लिए कड़े नियम हैं, जिनका यहाँ पूरी तरह उल्लंघन किया गया है। एक ओर सरकारी धन से खरीदी गई दवाइयों की बर्बादी और दूसरी ओर सार्वजनिक स्थल पर प्रदूषण।
यदि दवाएं खराब थीं या एक्सपायर हो चुकी थीं, तो नियमानुसार उनका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाना चाहिए था। उन्हें स्कूल के आंगन में फेंकना प्रशासन की घोर लापरवाही है। हम इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हैं। — स्थानीय निवासी
इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों ने जांच की बात कही है।
डॉ. अनिल (खंड स्वास्थ्य अधिकारी): उन्होंने पुष्टि की है कि मामला उनके संज्ञान में आ चुका है और पूरी घटना की गहन जांच करवाई जाएगी।
सुखिया राम (खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी): उन्होंने बताया कि मीडिया के माध्यम से उन्हें यह जानकारी मिली है। स्कूल प्रशासन से इस संबंध में जवाब तलब किया जाएगा कि स्कूल परिसर में ये दवाइयां कैसे पहुंचीं।
अब देखना यह है कि क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या यह मामला फाइलों में ही दबा रह जाता है। अभिभावकों में इस घटना को लेकर गहरा रोष है और वे दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।