शिमला।
हनुमान जयंती के पावन पर्व पर राजधानी शिमला की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित ऐतिहासिक जाखू मंदिर में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। समुद्र तल से 8000 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस सिद्धपीठ में सुबह 6 बजे से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं।
इस वर्ष का मुख्य आकर्षण हनुमान जी को अर्पित किया गया डेढ़ क्विंटल (150 किलो) का विशाल रोट रहा, जिसे विशेष रूप से तैयार कर सुबह तड़के भगवान को भोग लगाया गया।
हनुमान जन्मोत्सव के इस विशेष अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी धर्मपत्नी के साथ जाखू मंदिर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना की और आरती में भाग लिया। उनके साथ मंत्रिमंडल के सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे।
हनुमान जी शक्ति, सेवा और भक्ति के प्रतीक हैं। आज मैंने बजरंगबली के चरणों में शीश नवाकर समस्त प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और हिमाचल की उन्नति के लिए मंगल कामना की है। > — सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री
तड़के से ही शिमला की वादियों में 'जय श्री राम' और 'जय बजरंगबली' के जयकारे गूंजने लगे। स्थानीय निवासियों के अलावा बाहरी राज्यों से आए भारी संख्या में पर्यटकों ने भी मंदिर पहुंचकर हनुमान जी का आशीर्वाद लिया।
सुबह 6 बजे डेढ़ क्विंटल का रोट (महाप्रसाद) भगवान को अर्पित किया गया, जिसे बाद में श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। मंदिर परिसर में दिन भर भजन-कीर्तन और सामूहिक हनुमान चालीसा के पाठ से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा।
जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने भीड़ के प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए थे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह स्वयंसेवक तैनात रहे ताकि किसी को असुविधा न हो।
जाखू मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यहाँ स्थित हनुमान जी की 108 फीट ऊंची प्रतिमा दुनिया भर में आकर्षण का केंद्र है। हनुमान जयंती पर उमड़ी यह भारी भीड़ एक बार फिर यह दर्शाती है कि लोगों के मन में संकट मोचन के प्रति कितनी अगाध श्रद्धा और विश्वास है।