हमीरपुर।
हिमाचल प्रदेश में नशा माफिया के खिलाफ जारी 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत हमीरपुर पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। भोरंज थाने में तैनात दो कांस्टेबलों को चिट्टा तस्करों के साथ कथित तौर पर मिलीभगत और गोपनीय सूचनाएं साझा करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) हमीरपुर, बलवीर सिंह ठाकुर ने दोनों पुलिस कर्मियों को लाइनहाजिर करते हुए पुलिस लाइन दोसड़का में अटैच कर दिया है।
इस पूरे प्रकरण की विभागीय जांच का जिम्मा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) राजेश कुमार को सौंपा गया है। बीते शनिवार को एएसपी ने स्वयं भोरंज थाना पहुंचकर आरोपितों से कड़ी पूछताछ की और डिजिटल व अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए।
प्रारंभिक जांच में तस्करों के साथ नियमित संपर्क के पुख्ता संकेत मिलने के बाद अब जांच का दायरा आर्थिक लेन-देन तक बढ़ गया है। पुलिस आरोपियों के बैंक खातों और यूपीआई ट्रांजैक्शन की हिस्ट्री खंगाल रही है।
आशंका जताई जा रही है कि तस्करों को पुलिस की छापेमारी से बचाने के बदले मोटी रकम ली गई थी। सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क की जांच के दौरान विभाग के कुछ अन्य लोग भी रडार पर आ सकते हैं।
हाल ही में प्रदेश सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि नशा तस्करी में शामिल किसी भी सरकारी कर्मचारी, चाहे वह पुलिस में ही क्यों न हो, के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए।
पुलिस विभाग में काली भेड़ों के लिए कोई जगह नहीं है। तस्करों से संपर्क के प्रारंभिक साक्ष्य मिलने पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। यदि वित्तीय संलिप्तता सिद्ध होती है, तो सेवा से बर्खास्तगी जैसे कड़े कदम भी उठाए जा सकते हैं।— बलवीर सिंह ठाकुर, एसपी हमीरपुर
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी प्रदेश में एलएसडी (LSD) नशे की तस्करी के मामले में एसटीएफ (STF) के चार पुलिस कर्मियों को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। हमीरपुर की यह कार्रवाई प्रदेश भर के पुलिस बेड़े के लिए एक कड़ा संदेश है।