सोमवार को डॉक्टर नहीं मिलने पर मरीजों को डीडीयू अस्पताल का करना पड़ा रुख, पंचायत प्रधान ने दी रास्ता रोक आंदोलन की चेतावनी
घनाहटी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में डॉक्टर की कमी अब आसपास की पंचायतों के लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। सोमवार को इलाज और जांच के लिए पीएचसी पहुंचे कई मरीजों को डॉक्टर उपलब्ध नहीं मिला। इसके बाद उन्हें शिमला के अस्पतालों का रुख करना पड़ा, जिससे मरीजों को अतिरिक्त समय के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।
ग्रामीणों का कहना है कि घनाहटी पीएचसी पर आसपास की कई पंचायतों के सैकड़ों लोग स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निर्भर हैं। इसके बावजूद यहां स्थायी डॉक्टर की तैनाती नहीं होने के कारण लोगों को छोटी-छोटी जांच और उपचार के लिए भी शिमला जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से पीएचसी में जल्द स्थायी डॉक्टर तैनात करने की मांग की है।
सास को लेकर पहुंचीं, डॉक्टर नहीं मिला तो डीडीयू जाना पड़ा
पीएचसी में सोमवार को कई लोग अपनी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को लेकर पहुंचे। सुनीता शकराह अपनी सास को टेस्ट करवाने के लिए पीएचसी लेकर आई थीं। डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें डीडीयू अस्पताल शिमला जाना पड़ा।
वहीं दर्शित ने बताया कि वह स्कूल के एनसीसी फॉर्म पर हस्ताक्षर करवाने के लिए पीएचसी आया था, लेकिन डॉक्टर उपलब्ध नहीं मिला। प्रिया ने बताया कि वह रूटीन टेस्ट करवाने के लिए पीएचसी पहुंची थीं, लेकिन डॉक्टर नहीं होने के कारण अब उन्हें शिमला जाना पड़ रहा है।
डॉक्टर की ड्यूटी शोघी में लगाने पर नाराजगी
स्थानीय पंचायत प्रधान रोशन लाल ने कहा कि घनाहटी पीएचसी राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ स्थित है और यहां बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि सोमवार को डॉक्टर के पीएचसी में ज्वाइन करने की बात थी, लेकिन उनकी ड्यूटी शोघी में लगा दी गई।
रोशन लाल ने कहा कि घनाहटी पीएचसी में स्थायी डॉक्टर की तैनाती बेहद जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीणों के साथ मिलकर रास्ता रोक आंदोलन किया जाएगा।
दोपहर दो बजे भेजा डॉक्टर: सीएमओ
सीएमओ शिमला यशपाल रांटा ने कहा कि सोमवार को मामला उनके ध्यान में आया था। मरीजों की सुविधा को देखते हुए दोपहर करीब दो बजे डॉक्टर को घनाहटी पीएचसी भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि जल्द ही पीएचसी में स्थायी डॉक्टर की व्यवस्था की जाएगी, ताकि स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए परेशान न होना पड़े।
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