भारतीय सेना के 14वें पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल विश्वनाथ (वीएन) शर्मा का शुक्रवार को 96 वर्ष की आयु में दिल्ली में निधन हो गया। कांगड़ा जिले की पालमपुर तहसील के डाढ़ गांव से संबंध रखने वाले जनरल शर्मा भारतीय सेना के उन चुनिंदा सैन्य अधिकारियों में शामिल थे, जिन्होंने युद्धभूमि से लेकर सेना के सर्वोच्च पद तक का गौरवपूर्ण सफर तय किया।
जनरल वीएन शर्मा का जन्म वर्ष 1930 में हुआ था। उन्हें वर्ष 1950 में भारतीय सेना की 16वीं लाइट कैवेलरी में कमीशन मिला। वे स्वतंत्र भारत के बाद कमीशन प्राप्त करने वाले पहले अधिकारी थे, जो आगे चलकर भारतीय सेना के 14वें थल सेनाध्यक्ष बने। उन्होंने 1 मई 1988 से 30 जून 1990 तक भारतीय सेना का नेतृत्व किया।
1965 के युद्ध और कई अहम सैन्य अभियानों में निभाई भूमिका
मेजर के रूप में जनरल शर्मा ने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान लाहौर सेक्टर में मोर्चा संभाला। इसके अलावा उन्होंने श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (IPKF) के अभियान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1987 के भारत-चीन सैन्य गतिरोध के दौरान उनके नेतृत्व और रणनीतिक कौशल की व्यापक सराहना हुई।
परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा के छोटे भाई थे
जनरल वीएन शर्मा एक प्रतिष्ठित सैन्य परिवार से थे। वे भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा के छोटे भाई थे। उन्होंने अपना संपूर्ण सैन्य जीवन राष्ट्र की सुरक्षा, सैनिकों के कल्याण और भारतीय सेना की प्रतिष्ठा को सशक्त बनाने के लिए समर्पित किया।
उनके निधन पर सैन्य अधिकारियों, पूर्व सैनिकों और विभिन्न संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने जताया शोक
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जनरल वीएन शर्मा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने अपने महान सैन्य नायकों में से एक को खो दिया है।
वहीं मुख्यमंत्री ने कहा कि जनरल शर्मा ने अपने उत्कृष्ट नेतृत्व, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा से भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
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