धर्मशाला से लेह तक निकाली जा रही 'तिब्बत के लिए शांति पदयात्रा' के माध्यम से तिब्बती संस्कृति, मानवाधिकार, विश्व शांति और हिमालयी पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को किया जागरूक।
तिब्बत में शांति स्थापित करने, मानवाधिकारों की रक्षा, तिब्बती भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण तथा हिमालयी पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से निकाली जा रही 'तिब्बत के लिए शांति पदयात्रा' के तहत तिब्बती सामाजिक कार्यकर्ता कालसांग थरचेन शनिवार को जिस्पा पहुंचे।
इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से संवाद कर पदयात्रा के उद्देश्य और तिब्बत की वर्तमान परिस्थितियों पर विस्तार से जानकारी साझा की।
कालसांग थरचेन ने बताया कि यह पदयात्रा 15 जुलाई 2026 को धर्मशाला से शुरू हुई थी और हिमालयी क्षेत्रों से गुजरते हुए लेह तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य तिब्बत में मानवाधिकारों की स्थिति, तिब्बती भाषा, संस्कृति और धार्मिक पहचान के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तिब्बत के मुद्दे पर शांतिपूर्ण, मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की अपील भी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि तिब्बत केवल तिब्बती समुदाय का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध पूरे हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण, जल स्रोतों और पारिस्थितिकी तंत्र से है। इसलिए तिब्बत की सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण पूरे हिमालयी क्षेत्र और आने वाली पीढ़ियों के हित में आवश्यक है।
पदयात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर लोगों को तिब्बत की सांस्कृतिक विरासत, वर्तमान परिस्थितियों और शांति, करुणा तथा अहिंसा के संदेश से अवगत कराया जा रहा है। कालसांग थरचेन ने आम नागरिकों से मानवाधिकारों की रक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और विश्व शांति के समर्थन में आगे आने का आह्वान किया।
इस अवसर पर जिस्पा के स्थानीय लोगों ने पदयात्रा का स्वागत करते हुए शांति, सद्भाव, मानवता और पर्यावरण संरक्षण के संदेश का समर्थन व्यक्त किया।
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