24 वर्षों से निभाई जा रही सामाजिक परंपरा, रक्तदान शिविर, कवि गोष्ठी और हाटी लोक संस्कृति की प्रस्तुतियों से दी जाएगी हिमाचल निर्माता को श्रद्धांजलि
हिमाचल निर्माता एवं प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. वाईएस परमार की जयंती के अवसर पर सोलन में सिरमौर कल्याण मंच द्वारा सामाजिक सेवा, साहित्य और हिमाचली संस्कृति को समर्पित विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। मंच पिछले 24 वर्षों से लगातार डॉ. परमार की जयंती को रक्तदान, सांस्कृतिक गतिविधियों और सामाजिक सरोकारों के साथ मनाता आ रहा है।
सिरमौर कल्याण मंच के सदस्य यशपाल कपूर ने प्रदेशवासियों को डॉ. परमार की जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह आयोजन केवल औपचारिक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि समाज सेवा का एक सतत अभियान है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम सुबह 8 बजे से शुरू होकर रात करीब 10 बजे तक चलेगा।
मां शूलिनी के दर्शन से हुई शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत सोलन की अधिष्ठात्री मां शूलिनी के दर्शन से हुई। इसके बाद चिल्ड्रन्स पार्क स्थित डॉ. वाईएस परमार की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके उपरांत मंच की ओर से रक्तदान शिविर का शुभारंभ किया गया।
24 वर्षों में 1200 यूनिट से अधिक रक्तदान
यशपाल कपूर ने बताया कि सिरमौर कल्याण मंच पिछले 24 वर्षों से नियमित रूप से रक्तदान शिविर आयोजित कर रहा है। इस दौरान मंच द्वारा अब तक करीब 1200 यूनिट रक्त सोलन ब्लड बैंक को उपलब्ध कराया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि डॉ. परमार की जयंती पर रक्तदान करना जरूरतमंद लोगों की जान बचाने का माध्यम है और यही उनके सामाजिक आदर्शों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि भी है।
कवि गोष्ठी और लोक संस्कृति की होगी प्रस्तुति
कार्यक्रम के तहत कवि गोष्ठी और विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रदेशभर के कवि और साहित्यकार भाग लेंगे। साथ ही डॉ. परमार के साथ कार्य कर चुके लोग उनके जीवन, व्यक्तित्व और हिमाचल निर्माण से जुड़े अपने अनुभव साझा करेंगे।
शाम को आयोजित सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण होगी, जिसमें हाटी लोक कला मंच (कफोटा) और चूड़ेश्वर सेवा दल पारंपरिक लोक प्रस्तुतियां देंगे। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से हिमाचल की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी।
यशपाल कपूर ने कहा कि डॉ. वाईएस परमार ने हिमाचल के विकास की जो मजबूत नींव रखी, उसे याद रखना प्रत्येक हिमाचलवासी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि उनकी जयंती को सामाजिक सेवा, रक्तदान, साहित्य और संस्कृति से जोड़ना ही उनके प्रति सच्चा सम्मान है।
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