पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट, होटलों की ऑक्यूपेंसी 20-40% तक सिमटी; कारोबारियों को सितंबर के अंत का इंतजार
हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कुल्लू-मनाली में इस वर्ष मानसून ने पर्यटन कारोबार की रफ्तार धीमी कर दी है। अप्रैल से जून तक पर्यटकों की भारी आमद से गुलजार रहने वाला मनाली अब काफी हद तक सूना नजर आ रहा है।
लगातार बारिश, भूस्खलन और सड़कें बंद होने की घटनाओं के चलते पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई है, जिसका सीधा असर होटल, रेस्तरां और पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसायों पर पड़ा है।
पर्यटकों और वोल्वो बसों की संख्या घटी
ग्रीन टैक्स बैरियर के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में अन्य राज्यों से मनाली पहुंचने वाली वोल्वो बसों की संख्या घटकर प्रतिदिन 30 से 45 रह गई है, जबकि पर्यटन सीजन में यह संख्या 100 से अधिक होती थी। इसी तरह पर्यटक वाहनों की दैनिक आमद भी घटकर 400 से 500 के बीच रह गई है।
होटलों की ऑक्यूपेंसी 20 से 40 प्रतिशत तक सिमटी
पर्यटन विकास अधिकारी रोहित शर्मा ने बताया कि अप्रैल, मई और जून में पर्यटकों की अच्छी आमद रही, लेकिन मानसून शुरू होते ही स्थिति बदल गई। वर्तमान में होटलों की औसत ऑक्यूपेंसी केवल 30 से 40 प्रतिशत रह गई है।
वहीं, होटलियर एसोसिएशन मनाली के अध्यक्ष रोशन ठाकुर ने बताया कि कई होटलों में ऑक्यूपेंसी घटकर 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। कई छोटे होटल लगभग खाली हैं और होटल संचालकों को कर्मचारियों को अस्थायी छुट्टी पर भेजना पड़ रहा है।
बारिश और भ्रामक वीडियो भी बने वजह
पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि लगातार बारिश, भूस्खलन और सड़कें बंद होने की खबरों ने पर्यटकों में डर का माहौल बना दिया है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पुराने और भ्रामक बाढ़ व आपदा संबंधी वीडियो भी लोगों की यात्रा योजनाओं को प्रभावित कर रहे हैं।
सितंबर और विंटर सीजन से उम्मीदें
स्थानीय पर्यटन कारोबारी गजेंद्र ठाकुर, गौतम ठाकुर और भूपेश का कहना है कि हर साल मानसून के दौरान कारोबार धीमा पड़ता है, लेकिन आमतौर पर 20 सितंबर के बाद पर्यटकों की संख्या बढ़ने लगती है। उनका मानना है कि यदि मौसम सामान्य रहा और प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति नहीं बनी, तो आगामी विंटर सीजन पर्यटन उद्योग के लिए राहत लेकर आ सकता है।
फिलहाल, कुल्लू-मनाली का पर्यटन उद्योग मानसून की मार झेल रहा है और होटल व्यवसायी बेहतर मौसम के साथ पर्यटकों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं।
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