NEET पेपर लीक, जलविद्युत रॉयल्टी, पर्यावरण मुआवजे और मानसूनी आपदा समेत कई मुद्दों पर मुख्यमंत्री ने रखा सरकार का पक्ष
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 57वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का संबोधन कई महत्वपूर्ण घोषणाओं और राजनीतिक मुद्दों पर केंद्रित रहा। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय में आधुनिक तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नए पाठ्यक्रम शुरू करने और छात्र सुविधाओं के विस्तार के लिए वित्तीय सहायता देने की घोषणा की।
इसके अलावा उन्होंने NEET परीक्षा धांधली, पेपर लीक, हिमाचल के वित्तीय अधिकार, जलविद्युत परियोजनाओं की रॉयल्टी, पर्यावरणीय मुआवजे और मानसून से हुए नुकसान जैसे मुद्दों पर भी सरकार का पक्ष रखा।
HPU में शुरू होंगे AI और Machine Learning के पाठ्यक्रम
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय से जुड़ी छात्र जीवन की यादें साझा कीं। उन्होंने कहा कि उनके जीवन के आठ वर्ष इसी परिसर में बीते और यहीं से उन्होंने छात्र राजनीति की शुरुआत की थी।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने देश और प्रदेश को कई प्रतिभाशाली व्यक्तित्व दिए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय में भविष्य की जरूरतों को देखते हुए B.Tech (Artificial Intelligence) और Machine Learning जैसे आधुनिक पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की।
इसके साथ ही नए छात्रावास निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने का ऐलान किया।
NEET पेपर लीक मामले पर केंद्र सरकार पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार और भाजपा पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले छात्रों की परेशानियों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद उनकी सरकार ने अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड को भंग किया और मुख्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए उनके साथ खड़े हैं।
हिमाचल के वित्तीय अधिकार और रॉयल्टी का मुद्दा उठाया
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद किया जाना संविधान के अनुच्छेद-275 की भावना के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश को बड़ी मात्रा में पारिस्थितिक सेवाएं प्रदान करता है और इसके लिए राज्य को उचित पर्यावरणीय मुआवजा मिलना चाहिए।
उन्होंने 40 वर्ष पूरे कर चुकी जलविद्युत परियोजनाओं को राज्य को वापस सौंपने या उनमें 50 प्रतिशत रॉयल्टी देने की मांग भी दोहराई।
मानसूनी आपदा को लेकर सरकार तैयार: सीएम
मुख्यमंत्री ने हालिया बारिश और बादल फटने की घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि किन्नौर और कांगड़ा जिले के शाहपुर क्षेत्र में भारी बारिश और बादल फटने से करीब 19 मकान प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि घटना दिन के समय होने के कारण बड़ी जनहानि नहीं हुई और कुछ लोगों को मामूली चोटें आई हैं। मौसम साफ होने के बाद वह स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार राहत और बचाव कार्यों के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने पर्यटकों और स्थानीय लोगों से नदियों, खड्डों के किनारे जाने और जोखिम भरे कार्यों से बचने की अपील की।
अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का संदेश
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि अन्याय सहना भी गलत है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के अधिकारों, युवाओं और जनता के हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
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