पूर्व विधायक बलबीर चौधरी का आरोप- एफआईआर के बाद भी कार्रवाई धीमी, तीन साल के रिकॉर्ड की जांच की मांग
श्री माता चिंतपूर्णी मंदिर में सुगम दर्शन पास व्यवस्था से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले को लेकर हिमाचल प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। मंदिर प्रशासन की शिकायत के आधार पर पुलिस पहले ही मामला दर्ज कर जांच शुरू कर चुकी है, लेकिन अब भाजपा ने जांच प्रक्रिया और प्रदेश सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।
बुधवार को चिंतपूर्णी में आयोजित पत्रकार वार्ता में भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक बलबीर चौधरी ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी मामले में जांच आगे नहीं बढ़ रही है और पुलिस की कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित दिखाई दे रही है।
बलबीर चौधरी ने आरोप लगाया कि इस प्रकरण में जिन अधिकारियों की भूमिका सामने आ रही है, वे मुख्यमंत्री के करीबी हैं, जिसके चलते सरकार मामले को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग उठाई।
उन्होंने कहा कि जब मंदिर में सुगम दर्शन प्रणाली लागू की गई थी, तभी भाजपा ने इस व्यवस्था को लेकर आशंकाएं जताई थीं। अब मंदिर प्रशासन की जांच और पुलिस केस दर्ज होने के बाद वे आशंकाएं सही साबित होती नजर आ रही हैं।
पूर्व विधायक ने बताया कि मंदिर प्रशासन की जांच में 19 जून के रिकॉर्ड में डिजिटल भुगतान से जुड़े संदिग्ध लेन-देन सामने आए थे। इनमें एक ही ट्रांजैक्शन आईडी और मोबाइल नंबर के बार-बार इस्तेमाल की बात सामने आई थी। इसी आधार पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
उन्होंने मांग की कि पिछले तीन वर्षों के सभी रिकॉर्ड की गहन जांच कराई जाए, ताकि यदि कोई वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी पूरी सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने दावा किया कि विस्तृत जांच में बड़े स्तर पर गड़बड़ियों का खुलासा हो सकता है।
बलबीर चौधरी ने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करती रहेगी। उन्होंने प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार के मामलों में सख्ती नहीं बरतने का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।
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