सीडीएससीओ की जांच में एंटीबायोटिक, बच्चों के सीरप, हृदय रोग और अन्य जरूरी दवाओं के सैंपल मिले असफल; कंपनियों पर कार्रवाई शुरू
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के जून ड्रग अलर्ट में देशभर की 159 दवाएं और कॉस्मेटिक सैंपल गुणवत्ता मानकों पर असफल पाए गए हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश में निर्मित 45 दवाओं के सैंपल भी शामिल हैं।
सीडीएससीओ की रिपोर्ट के अनुसार, कुल फेल हुए सैंपलों में 132 राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं और 27 केंद्रीय प्रयोगशालाओं की जांच में गुणवत्ता की कसौटी पर खरे नहीं उतरे। हिमाचल के बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी, भुड्ड, गुल्लरवालां, कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाणू, सोलन और कांगड़ा स्थित दवा उद्योगों के उत्पाद इस सूची में शामिल हैं।
एंटीबायोटिक और बच्चों के सीरप समेत कई दवाएं फेल
ड्रग अलर्ट में एंटीबायोटिक, हृदय रोग की दवाएं, दर्द और बुखार की दवाएं, बच्चों के सीरप, खांसी की दवाएं, पेट संबंधी दवाएं, आंखों की दवाएं, इंजेक्शन और विटामिन उत्पाद शामिल हैं।
जांच में कई दवाएं डिसॉल्यूशन, कंटेंट, एस्से, स्टेरिलिटी, पीएच, पार्टिकुलेट मैटर और सक्रिय औषधीय तत्व (API) की निर्धारित मात्रा जैसे महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानकों पर असफल रही हैं।
हिमाचल की सबसे अधिक 45 दवाएं फेल
जून ड्रग अलर्ट में हिमाचल प्रदेश के अलावा उत्तराखंड और गुजरात की दवाओं के सैंपल भी फेल पाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार:
गुणवत्ता जांच में असफल रही हैं। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, बिहार, राजस्थान, तेलंगाना, कर्नाटक और असम समेत अन्य राज्यों की कुछ दवाएं भी सूची में शामिल हैं।
हिमाचल में बनी इन दवाओं के सैंपल फेल
हिमाचल के नालागढ़ स्थित पेसिफिक इंडिया उद्योग में निर्मित इटोडोलैक दवा का सैंपल फेल पाया गया। यह दवा जोड़ों के दर्द, ऑस्टियोआर्थराइटिस, रूमेटाइड आर्थराइटिस, कमर दर्द और सूजन जैसी समस्याओं में उपयोग की जाती है।
बद्दी स्थित समायन हेल्थकेयर उद्योग में बनी एडेनोसाइन इंजेक्शन और सिरमौर के गनोसिस फार्मास्युटिकल्स में निर्मित टेलमिसार्टन 80 एमजी के सैंपल भी गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।
टेलमिसार्टन दवा का उपयोग उच्च रक्तचाप, हृदय रोग के जोखिम को कम करने और मधुमेह मरीजों में किडनी सुरक्षा के लिए किया जाता है।
अन्य राज्यों की कई महत्वपूर्ण दवाएं भी जांच में असफल
ड्रग अलर्ट में गुजरात, बिहार, तमिलनाडु, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की कई दवाएं भी शामिल हैं।
गुजरात में निर्मित परमेथरिन मेडिकेटेड सोप, बिहार की मैग्नीशियम सल्फेट इंजेक्शन, तमिलनाडु की रेनिटिडाइन ओरल सॉल्यूशन और अजिथ्रोमाइसिन ओरल सस्पेंशन, उत्तराखंड की सिट्राजिन सीरप और गामा बेंजीन हेक्साक्लोराइड लोशन तथा महाराष्ट्र की जेंटामाइसिन इंजेक्शन के सैंपल फेल पाए गए हैं।
कंपनियों पर कार्रवाई शुरू
राज्य औषधि नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने बताया कि जिन हिमाचली दवा कंपनियों के उत्पाद गुणवत्ता जांच में असफल पाए गए हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि संबंधित बैचों की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। कंपनियों से जवाब मांगा गया है और जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दवा गुणवत्ता को लेकर सामने आई इस रिपोर्ट के बाद फार्मा उद्योगों की निगरानी और सख्त करने की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है।
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