धर्मशाला
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा मंत्रियों, विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों के वेतन का एक हिस्सा डिफर (स्थगित) करने संबंधी अधिसूचना को जारी करने के तुरंत बाद वापस लेने पर सूबे की सियासत गरमा गई है।
इस यू-टर्न को लेकर धर्मशाला से भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर तीखा जुबानी हमला बोला है। सुधीर शर्मा ने दोटूक कहा कि प्रदेश में वर्तमान सरकार की निर्णय लेने की प्रक्रिया पूरी तरह अस्थिर और दिशाहीन हो चुकी है।
बिना सलाह के लिए जा रहे फैसले, विधायक-मंत्री भी नहीं उठाते फोन
मीडिया से बातचीत करते हुए भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सुबह कोई फैसला लेते हैं और शाम होते-होते उसे खुद ही बदल देते हैं।
उन्होंने कहा मुख्यमंत्री फैसलों को लेकर न तो कैबिनेट सहयोगियों से कोई सलाह लेते हैं और न ही संगठन में चर्चा करते हैं। वे बिना यह सोचे-समझे तुगलकी फरमान जारी कर देते हैं कि आने वाले समय में इसके क्या गंभीर परिणाम होंगे। हालात ऐसे हो चुके हैं कि अब तो खुद सरकार के विधायक और मंत्री भी डर के मारे फोन तक उठाना बंद कर चुके हैं।
जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में देरी पर साधा निशाना
जिला परिषद और पंचायत समिति में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव अब तक न करवाए जाने को लेकर भी सुधीर शर्मा ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि नियम के अनुसार नतीजों के 30 दिन के भीतर ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव करवाने अनिवार्य होते हैं।
सरकार अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार तिथियां तय कर रही है और वर्तमान में जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों पर प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा है। सुधीर शर्मा ने कहा कि यह सरकार की हताशा को दर्शाता है, लेकिन सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि हॉर्स ट्रेडिंग या दबाव से कुछ हासिल होने वाला नहीं है और जनता के जनादेश का हर हाल में सम्मान किया जाना चाहिए।
नीरज भारती के निष्कासन पर बोले- 'कांग्रेस में ऐसी परिस्थितियां पहले कभी नहीं देखीं'
पूर्व मुख्य संसदीय सचिव (CPS) नीरज भारती को कांग्रेस पार्टी से निष्कासित किए जाने के सवाल पर सुधीर शर्मा ने कहा कि यह पूरी तरह से कांग्रेस पार्टी का आंतरिक मामला है कि वे किसे पार्टी में रखना चाहते हैं और किसे नहीं।
लेकिन इसके साथ ही उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जिस तरह की अंतर्कलह और परिस्थितियां आज हिमाचल कांग्रेस के भीतर उत्पन्न हो चुकी हैं, वैसी अराजक परिस्थितियां प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में पहले कभी देखने को नहीं मिलीं।