बिलासपुर
हिमाचल प्रदेश के नगर व ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि बिलासपुर एम्स (AIIMS) की महत्वाकांक्षी 'आपात सेतु' (Apath Setu) पहल को प्रदेश के अन्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ते हुए पूरे राज्य में लागू करने का प्रयास किया
जाएगा। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में गंभीर मरीजों को समयबद्ध और उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित करना है। इस राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत सबसे पहले जिला बिलासपुर के स्वास्थ्य संस्थानों को एम्स से जोड़कर की जाएगी।
कैबिनेट मंत्री राजेश धर्माणी गुरुवार को एम्स बिलासपुर का दौरा करने के बाद संस्थान के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
रैफरल प्रक्रिया होगी आसान, समय पर शुरू होगा इलाज
'आपात सेतु' पहल की कार्यप्रणाली और फायदों के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि इस डिजिटल और त्वरित तकनीक के माध्यम से आपातकालीन स्थिति में जब किसी मरीज को एक प्राथमिक या क्षेत्रीय अस्पताल से दूसरे बड़े संस्थान (जैसे एम्स) में रेफर किया जाता है,
तो मरीज की बीमारी, रिपोर्ट और संपूर्ण मेडिकल हिस्ट्री संबंधित उच्च चिकित्सा संस्थान को पहले ही ऑनलाइन उपलब्ध हो जाती है। इसके कारण जब तक मरीज अस्पताल पहुंचता है, वहां के डॉक्टर इलाज की पूरी तैयारी रख सकते हैं, जिससे मरीज का कीमती समय बचता है और उसे तुरंत बेहतर उपचार मिल जाता है।
एम्स के विकास के लिए 7 करोड़ की पेयजल योजना और बिजली ग्रिड तैयार
राजेश धर्माणी ने कहा कि एम्स को देश का नंबर-वन चिकित्सा संस्थान बनाने के लिए प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार प्रतिबद्ध है और संस्थान की हर समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जा रहा है।
उन्होंने सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए बताया एम्स परिसर के लिए 132 केवी का विद्युत उपकेंद्र (Substation) स्थापित किया जा चुका है और ट्रांसमिशन लाइन के काम को भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
एम्स में पानी की निर्बाध आपूर्ति के लिए 7 करोड़ रुपये की लागत से कोलडैम से विशेष पेयजल आपूर्ति योजना का निर्माण किया जा रहा है। एम्स अस्पताल से जुड़ी नगर व ग्राम नियोजन (TCP) संबंधी जटिल समस्याओं का पहले ही निपटारा किया जा चुका है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने आश्वासन दिया कि संस्थान परिसर के बाहर मरीजों की सुविधा के लिए रेन शेल्टर, पार्किंग, अतिरिक्त स्टाफ क्वार्टर और यहां कार्यरत कर्मचारियों के लिए बेहतर परिवहन (बस) सेवाओं की समस्याओं को भी जल्द सुलझाया जाएगा।
प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में भी लगेंगे विश्व स्तरीय आधुनिक उपकरण
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिलासपुर जिला में एम्स जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थान का होना पूरे हिमाचल के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि एम्स में स्थापित आधुनिक एवं विश्व स्तरीय चिकित्सा उपकरणों की तर्ज पर ही प्रदेश के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों और क्षेत्रीय अस्पतालों में भी अत्याधुनिक मशीनें स्थापित करने की
दिशा में ठोस प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि वर्तमान में एम्स में कुल 750 बेड की क्षमता के मुकाबले प्रबंधन द्वारा बेहतरीन व्यवस्था करते हुए 760 मरीजों को एडमिट कर उपचार की सुविधा दी जा रही है।
इससे पहले एम्स बिलासपुर के कार्यकारी निदेशक ले. जनरल दलजीत सिंह ने मुख्य अतिथि राजेश धर्माणी का संस्थान पहुंचने पर स्वागत किया और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दी।
बैठक के उपरांत कैबिनेट मंत्री ने अस्पताल परिसर का दौरा कर वहां मरीजों को मिल रही सुविधाओं का धरातल पर जायजा भी लिया। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान जिला उपायुक्त (DC) बिलासपुर राहुल कुमार, अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) ओम कांत ठाकुर, एसडीएम (SDM) डॉ. राजदीप सिंह सहित एम्स संस्थान के कई वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी एवं विभागाध्यक्ष मुख्य रूप से उपस्थित रहे।