मंडी:
हिमाचल प्रदेश के मंडी नगर निगम के चुनावी रण के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी बहुप्रतीक्षित रणनीति का खुलासा कर दिया है। सत्ता विरोधी लहर को मात देने के लिए भाजपा ने इस बार 'नो-रिपीट' फॉर्मूले की तर्ज पर कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी ने कुल 15 वार्डों में से 12 वार्डों में बिल्कुल नए चेहरों को मैदान में उतारकर सबको चौंका दिया है।
पूर्व मेयर को झटका, दिग्गजों के कटे पत्ते
टिकट आवंटन में सबसे बड़ी गाज पूर्व महापौर वीरेंद्र भट्ट पर गिरी है। आरक्षण रोस्टर बदलने के कारण उनका गृह वार्ड (पुरानी मंडी) महिला आरक्षित हो गया था। भट्ट ने वार्ड नंबर-1 खलियार से दावेदारी जताई थी, लेकिन पार्टी ने उन्हें दरकिनार कर पूर्व जिला अध्यक्ष रणवीर सिंह सेन पर भरोसा जताया है।
इसी तरह बैहना के पूर्व पार्षद कृष्ण भानु को भी पार्टी ने इस बार मौका नहीं दिया है।
इन पार्षदों की बची साख; हरदीप राजा का 'पावर गेम'
जहाँ कई दिग्गजों की विदाई हुई, वहीं कुछ अपनी साख बचाने में कामयाब रहे:
हरदीप सिंह राजा: पैलेस कॉलोनी-1 से पूर्व पार्षद रहे राजा खुद दौड़ से बाहर हुए लेकिन अपनी पत्नी गुरदीप कौर को टिकट दिलाने में सफल रहे।
रिटेन चेहरे: सुमन ठाकुर, नेहा कुमारी, निर्मल कुमारी और वीरेंद्र आर्य अपने पिछले प्रदर्शन के दम पर दोबारा टिकट हासिल करने में सफल रहे हैं। समखेतर की पूर्व पार्षद निर्मल अब पड्डल वार्ड से चुनाव लड़ेंगी।
विधायक अनिल शर्मा की पसंद को प्राथमिकता
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि टिकटों के चयन में स्थानीय सदर विधायक और पूर्व मंत्री अनिल शर्मा की राय को सबसे ऊपर रखा गया है। पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं और ऊर्जावान कार्यकर्ताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। गौरतलब है कि 15 वार्डों के लिए 60 से अधिक आवेदन आए थे, जिससे पार्टी के भीतर मचे घमासान का अंदाजा लगाया जा सकता है।
भाजपा का स्पष्ट संदेश
12 नए चेहरों को उतारकर भाजपा ने यह संदेश दे दिया है कि वह केवल 'जिताऊ और सक्रिय' उम्मीदवारों के सहारे ही निगम की सत्ता पर दोबारा काबिज होना चाहती है। नए चेहरों के आने से जहाँ एक ओर कार्यकर्ताओं में उत्साह है, वहीं टिकट कटने से नाराज गुटों को साधना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती होगी।