शिमला:
राजधानी शिमला के सुप्रसिद्ध कमला नेहरू अस्पताल (KNH) में राज्य सरकार के एक फैसले के खिलाफ कर्मचारियों और स्वास्थ्य कर्मियों ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है। अस्पताल के गायनी (प्रसूति) विभाग और ओपीडी को अन्यत्र शिफ्ट किए जाने के निर्णय के विरोध में आज कर्मचारियों ने काले बिल्ले लगाकर अपना रोष प्रकट किया।
व्यवस्थाएं चरमराने का आरोप
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से न केवल अस्पताल की साख पर असर पड़ा है, बल्कि सुपरस्पेशलिटी दर्जे के इस अस्पताल की पूरी व्यवस्था गड़बड़ा गई है। कर्मचारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस निर्णय के कारण आम महिला मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों की मुख्य समस्याएं
कर्मचारियों और चिकित्सकों को अब दो अलग-अलग अस्पतालों में ड्यूटी देनी पड़ रही है, जिससे उनके कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। शिफ्टिंग के कारण कर्मचारियों को एक परिसर से दूसरे परिसर तक भागदौड़ करनी पड़ रही है, जिससे वे मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान हैं।
दूर-दराज से आने वाली गर्भवती महिलाओं और अन्य महिला मरीजों को ओपीडी और अन्य सुविधाओं के लिए भटकना पड़ रहा है।
पुनर्विचार की मांग
कर्मचारी संगठनों ने सरकार और प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार नहीं किया गया और पुरानी व्यवस्था बहाल नहीं की गई, तो यह आंदोलन और उग्र रूप धारण कर सकता है।
पहली बार इस मुद्दे पर अस्पताल का स्टाफ खुलकर सामने आया है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ गया है। कर्मचारियों का तर्क है कि के.एन.एच. शिमला का एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण अस्पताल है, जिसकी पहचान को इस तरह की अव्यवस्थित शिफ्टिंग से नुकसान पहुँचाना न्यायसंगत नहीं है।