शिमला:
हिमाचल प्रदेश सरकार ने वन विभाग के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव करते हुए वनरक्षक (Forest Guard) के 500 पदों को समाप्त करने का निर्णय लिया है। सरकार ने इन पदों के स्थान पर अब 500 सहायक वनरक्षक (Assistant Forest Guard) के नए पद सृजित किए हैं। इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) कमलेश कुमार पंत द्वारा औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है।
कैबिनेट की मुहर और मानदेय का निर्धारण
हाल ही में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव पर गहन चर्चा के बाद मंजूरी दी गई थी। सरकार के इस निर्णय के अनुसार नवनियुक्त सहायक वनरक्षकों को 16,000 रुपये प्रतिमाह के फिक्स मानदेय पर नियुक्त किया जाएगा। भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश विभाग को दे दिए गए हैं।
वन मित्रों के लिए 50% कोटा आरक्षित
इस नई भर्ती प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने इसमें 50 प्रतिशत आरक्षण वन मित्रों के लिए निर्धारित किया है। वन मित्रों के लिए किसी भी प्रकार के कार्य अनुभव की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है, ताकि अधिक से अधिक स्थानीय युवाओं को रोजगार का अवसर मिल सके।
पूरी भर्ती प्रक्रिया में नियमानुसार रोस्टर प्रणाली लागू की जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
क्यों लिया गया यह निर्णय?
सरकार का तर्क है कि वन क्षेत्रों की बेहतर निगरानी और जमीनी स्तर पर कार्य व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। सहायक वनरक्षकों की तैनाती से वनों की सुरक्षा और अवैध कटान जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
कर्मचारियों में चर्चा का विषय
वनरक्षक के पदों को समाप्त कर कम मानदेय पर सहायक वनरक्षक भर्ती करने के इस निर्णय ने विभाग के भीतर एक नई बहस छेड़ दी है। पहले से कार्यरत कर्मचारियों और संगठनों के बीच इस प्रशासनिक बदलाव के दूरगामी परिणामों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
जहाँ एक ओर सरकार इसे युवाओं के लिए रोजगार का नया अवसर बता रही है, वहीं दूसरी ओर वेतन विसंगति और पदनाम के बदलाव को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।