हमीरपुर
हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने लोकसभा में हमीरपुर जिले की बैंकिंग व्यवस्था और कम क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात (CDR) का मुद्दा जोर-शोर से उठाया है। संसद के प्रश्नकाल के दौरान उन्होंने जिले में ऋण वितरण की धीमी गति पर चिंता जताई और सरकार से इसमें तत्काल सुधार की मांग की।
अनुराग ठाकुर ने सदन को बताया कि हमीरपुर जिले का क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात केवल 23.39 प्रतिशत है, जो देश के सबसे कम अनुपात वाले क्षेत्रों में से एक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले के लोग बैंकों में अपनी मेहनत की कमाई जमा तो कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय युवाओं, किसानों और छोटे उद्यमियों को उसी अनुपात में ऋण (Loan) उपलब्ध नहीं
हो पा रहा है। इसका सीधा असर जिले में रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों पर पड़ रहा है।
अनुराग ठाकुर ने बैंकिंग क्षेत्र में आए बदलावों की सराहना करते हुए कहा कि 12 साल पहले जहां 12 में से 11 सार्वजनिक बैंक संकट (PCA) में थे, वहीं आज सभी बैंक लाभ में हैं।
हालांकि, उन्होंने ऋण वसूली न्यायाधिकरणों (DRT) में लंबित मामलों पर निशाना साधते हुए कहा छोटे ऋण मामलों के निस्तारण में अभी भी बहुत समय लग रहा है। इन न्यायाधिकरणों की कार्यक्षमता बढ़ाने और प्रक्रियाओं को तेज करने के लिए प्रशासनिक सुधार जरूरी हैं।
सांसद के सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने माना कि क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात में क्षेत्रीय असंतुलन एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि पिछले तीन वर्षों से सरकार बैंकों के साथ मिलकर इस संतुलन को ठीक करने के लिए सक्रिय है।
कम ऋण उठाव वाले क्षेत्रों में बैंकों को व्यापारिक संगठनों और उद्योग जगत के साथ जोड़कर ऋण वितरण बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। ऋण वसूली न्यायाधिकरणों (DRT) में रिक्त पदों को भरने और प्रशासनिक सुधारों को प्राथमिकता दी जा रही है।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि वे इस मुद्दे को लगातार जिला स्तरीय बैंकर्स समीक्षा समिति (DLRC) और अन्य मंचों पर उठाते रहे हैं। उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि देश की मजबूत बैंकिंग व्यवस्था का लाभ हमीरपुर के आम नागरिकों, युवाओं और उद्यमियों को समान रूप से मिले ताकि क्षेत्र की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो सके।