ऊना।
हिमाचल प्रदेश में टोल बैरियरों पर बढ़ी हुई दरों को लेकर चल रहा गतिरोध अब और उग्र होता जा रहा है। इस विवाद में अब ऊना जनहित मोर्चा ने भी सीधी एंट्री कर ली है। मोर्चे के अध्यक्ष राजीव भनोट ने प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचकर अपना समर्थन दिया और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखे जुबानी हमले किए।
धरने को संबोधित करते हुए राजीव भनोट ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे प्रदेश के अधिकारियों ने खुद मुख्यमंत्री को ही गुमराह कर दिया है या "फिरकी" दे दी है।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा के भीतर पुरानी दरें बहाल करने का आश्वासन दिया था, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। सदन की मर्यादा को देखते हुए सरकार को अपनी घोषणा पर अडिग रहना चाहिए था, ताकि जनता का विश्वास बना रहे।— राजीव भनोट, अध्यक्ष, ऊना जनहित मोर्चा
भनोट ने आरोप लगाया कि सरकार की 'कथनी और करनी' में भारी अंतर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल छोटी गाड़ियों के लिए ₹100 की दर तय करना और बड़ी गाड़ियों के रेट कम न करना जनता और ट्रांसपोर्टरों के साथ सरासर वादाखिलाफी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिमाचल की अस्मिता के लिए लड़ी जा रही इस लड़ाई में यह टोल बैरियर देर-सबेर हटाने ही पड़ेंगे।
जहाँ एक ओर भनोट ने सरकार को घेरा, वहीं दूसरी ओर उन्होंने प्रदर्शनकारियों को भी संयम बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा विरोध प्रदर्शन के दौरान नारों और भाषा की मर्यादा बनी रहनी चाहिए। उन्होंने माना कि जनता की जागरूकता और विरोध के कारण ही सरकार को अपने कदमों को कुछ हद तक पीछे खींचने पर मजबूर होना पड़ा है।
मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में किए गए वादे के अनुसार सभी वाहनों के लिए तत्काल पुरानी दरें लागू की जाएं। बड़ी गाड़ियों और ट्रकों से वसूली जा रही भारी भरकम राशि को तुरंत कम किया जाए। टोल के कारण सीमावर्ती इलाकों में पैदा हुए तनावपूर्ण माहौल को समाप्त कर वाहन चालकों को राहत दी जाए।
राजीव भनोट ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने अपने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया और विधानसभा में दिए गए आश्वासन को अक्षरशः लागू नहीं किया, तो ऊना जनहित मोर्चा इस आंदोलन को और तेज करेगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई जनहित की है और इसे तार्किक अंजाम तक पहुँचाया जाएगा।