कांगड़ा I
हिमाचल प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज (RPGMC) टांडा ने आधुनिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। संस्थान में पहली बार रोबोटिक तकनीक की मदद से सफलतापूर्वक किडनी ट्रांसप्लांट (व्हिपल्स और नेफ्रोलॉजी सर्जरी के आधुनिक मेल) को अंजाम दिया गया।
इस उपलब्धि के साथ ही अब हिमाचल के मरीजों को जटिल ऑपरेशनों के लिए पीजीआई चंडीगढ़ या एम्स दिल्ली के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
यह कहानी केवल तकनीक की नहीं, बल्कि अटूट प्रेम की भी है। अजय कुमार की जिंदगी लंबे समय से डायलिसिस की सुइयों के बीच फंसी हुई थी। जब डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट की सलाह दी, तो उनकी पत्नी लवली ने बिना हिचकिचाए अपनी किडनी देने का फैसला किया। जांच में ब्लड ग्रुप मैच होने पर लवली ने कहा, "यह तो मेरा फर्ज है।" लवली के इस त्याग ने अजय को नया जीवन दिया है।
संस्थान में यह 23वां किडनी ट्रांसप्लांट था, लेकिन रोबोटिक आर्म की मदद से किया गया यह अपनी तरह का पहला मामला है। सर्जन के हाथों के साथ रोबोटिक आर्म ने मिलीमीटर जितनी बारीक सटीकता से नसों को जोड़ा। रोबोटिक सर्जरी की वजह से शरीर में कोई बड़ा चीरा नहीं लगाना पड़ा, खून की हानि नाममात्र हुई और मरीज की रिकवरी अब सामान्य से कहीं अधिक तेज होगी।
इस जटिल सर्जरी को सफल बनाने में विभिन्न विभागों का सामूहिक प्रयास रहा सर्जिकल टीम डॉ. अमित शर्मा, डॉ. सोमराज महाजन, डॉ. आशीष शर्मा, डॉ. दीपेश और डॉ. कुशल, नेफ्रोलॉजी टीम (निगरानी) डॉ. अभिनव राणा, डॉ. दिव्यम, डॉ. साक्षी और डॉ. हर्षिता, एनेस्थीसिया डॉ. ननीश और उनकी टीम, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर नीरज जम्वाल और कल्पना शर्मा ने कागजी व डोनर प्रक्रिया पूरी की।
संस्थान के प्राचार्य डॉ. मिलाप शर्मा के मार्गदर्शन में टांडा मेडिकल कॉलेज अब सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं का केंद्र बन रहा है। उनके नेतृत्व में शुरू हुआ रोबोटिक प्रोग्राम आज इस सफल मुकाम तक पहुँचा है। ओटी स्टाफ ने इस सर्जरी के लिए दिन-रात रिहर्सल की थी, जिसका परिणाम आज सफल ऑपरेशन के रूप में सामने आया है।