ऊना
हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया के साथ ही चुनावी बिसात बिछ गई है। ऊना जिले के सबसे चर्चित टक्का जिला परिषद वार्ड में मुकाबला बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय होने की उम्मीद है।
वीरवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता शोभित गौतम और भाजपा समर्थित प्रत्याशी जसबीर बिट्टा ने अपने-अपने समर्थकों के साथ नामांकन पत्र दाखिल कर चुनावी रण में हुंकार भरी।
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता शोभित गौतम ने टक्का वार्ड से बतौर आजाद उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल किया। उनके साथ भारी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। मीडिया से बात करते हुए गौतम ने कहा कि वह क्षेत्र के विकास और युवाओं के रोजगार को अपनी मुख्य प्राथमिकता मानते हैं।
उन्होंने कहा, मैं विकास के लिए एक अलग और ठोस रोडमैप तैयार करूँगा। ये चुनाव बदलाव की घड़ी हैं और मेरा लक्ष्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को हर घर के द्वार तक पहुँचाना है। उनके चुनावी मैदान में उतरने से इस सीट पर राजनीतिक समीकरण काफी बदल गए हैं।
जसवीर बिट्टा: भाजपा के 'विश्वास' पर जीत का दावा
दूसरी ओर, भाजपा समर्थित प्रत्याशी जसबीर बिट्टा ने भी इसी सीट से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। बिट्टा के साथ भाजपा के कई दिग्गज नेता और उत्साहित कार्यकर्ता मौजूद रहे।
नामांकन के बाद बिट्टा ने कहा कि उनका मुख्य ध्येय ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं जैसे सड़क, पानी और बिजली की व्यवस्था को और बेहतर करना है। उन्होंने टिकट और समर्थन के लिए पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि भाजपा की लहर और कार्यकर्ताओं की एकजुटता उन्हें ऐतिहासिक जीत दिलाएगी।
टक्का वार्ड में 'हाई-प्रोफाइल' मुकाबला
टक्का वार्ड में जिस तरह से प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के चेहरे चुनाव मैदान में उतर रहे हैं, उससे यहाँ 'कांटे की टक्कर' होने की पूरी आशंका है। एक तरफ जहाँ शोभित गौतम अपनी राष्ट्रीय पहचान और विजन के साथ मैदान में हैं, वहीं जसबीर बिट्टा भाजपा के मजबूत संगठन और जमीनी पकड़ के भरोसे हैं।
इस टक्कर ने न केवल स्थानीय मतदाताओं बल्कि पूरे जिले के राजनीतिक पंडितों का ध्यान इस सीट की ओर खींच लिया है।
समर्थकों में दिखा भारी जोश
नामांकन के दौरान दोनों ही प्रत्याशियों के समर्थकों में भारी जोश देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों और नारेबाजी के बीच दोनों उम्मीदवारों ने अपना शक्ति प्रदर्शन किया। टक्का वार्ड के निवासियों का मानना है कि इस बार चुनाव जाति और क्षेत्र के बजाय विकास के मुद्दों पर केंद्रित होगा।
अब देखना यह होगा कि बदलाव की इस बयार में जनता राष्ट्रीय प्रवक्ता के रोडमैप को चुनती है या भाजपा के विकास के दावों को।