हमीरपुर
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहाँ नाविक की लापरवाही ने एक हँसते-खेलते परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। बुधवार रात थाना कुरारा के ग्राम कोतुपुर पटिया में यमुना नदी पार कर लौट रहे ग्रामीणों से भरी नाव बीच धारा में पलट गई।
नाव पर सवार 9 लोगों में से नाविक समेत 3 लोग सुरक्षित बाहर निकल आए, जबकि 5 मासूम बच्चों सहित 6 लोग अभी भी लापता हैं। प्रशासन ने मौके पर एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें तैनात कर बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
शादी की खुशियों के बीच छाया मातम
हादसे का शिकार हुए सभी लोग कोतुपुर पटिया गांव के श्रीपाल के घर आयोजित शादी समारोह में शामिल होने आए थे। मंगलवार को बेटी की विदाई के बाद बुधवार शाम करीब 7:00 बजे रिश्तेदार और बच्चे पास ही स्थित खरबूजे के खेतों में गए थे।
वहां से लौटते समय रात करीब 8:30 बजे यह भीषण हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि नाव में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे और न ही किसी यात्री ने लाइफ जैकेट पहनी थी।
नाविक की लापरवाही: कॉल आते ही बिगड़ा संतुलन
नदी से सुरक्षित बचकर निकले रिंकू ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि हादसा नाविक विष्णु की गंभीर लापरवाही के कारण हुआ। जब नाव नदी की तेज और गहरी धारा के बीचों-बीच थी, तभी नाविक के मोबाइल पर एक कॉल आई। वह खड़ा होकर फोन पर बात करने लगा, जिससे उसका ध्यान भटक गया और नाव का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया। देखते ही देखते पूरी नाव नदी में समा गई और चारों तरफ चीख-पुकार मच गई।
दो सगे भाइयों समेत छह की तलाश जारी
हादसे में लापता लोगों में घाटमपुर से आए दो सगे भाई, गोरेलाल (5) और आदित्य (11) भी शामिल हैं। इनके अलावा ब्रजरानी, रानी (9), आकांक्षा और लव्यांश (5) का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल सका है।
नाविक विष्णु खुद तैरकर बाहर निकल आया, जबकि रिंकू और 14 वर्षीय पारुल को भी सुरक्षित बचा लिया गया। दोनों घायलों को कुरारा सीएचसी के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया है, जहाँ उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
भारी पुलिस बल और NDRF का सर्च ऑपरेशन
हादसे की सूचना मिलते ही डीएम, एसपी, एसडीएम अभिषेक कुमार और सीओ सदर राजेश कमल भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। रात के अंधेरे में भी स्थानीय गोताखोरों ने तलाश शुरू की, लेकिन बहाव तेज होने के कारण सफलता नहीं मिली।
गुरुवार सुबह से कानपुर से बुलाई गई एसडीआरएफ (SDRF) और एनडीआरएफ की टीमों ने आधुनिक उपकरणों और कई नावों की मदद से लापता बच्चों की तलाश तेज कर दी है।
प्रशासन की चेतावनी और भविष्य की योजना
एसडीएम अभिषेक कुमार ने बताया कि नाविक की लापरवाही की जांच की जा रही है और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई होगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नदी किनारे बिना सुरक्षा उपकरणों (लाइफ जैकेट या रबर ट्यूब) के नाव संचालन पर सख्त प्रतिबंध है।
फिलहाल पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और लापता बच्चों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जिनकी उम्मीदें अब केवल रेस्क्यू टीमों की सफलता पर टिकी हैं।