धर्मशाला
हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह 'सुक्खू' सरकार द्वारा राज्य के विजिलेंस विभाग और एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) को सूचना के अधिकार (RTI) के दायरे से बाहर करने के फैसले ने तूल पकड़ लिया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र और पारदर्शिता पर हमला करार दिया है।
भाजपा के प्रदेश मीडिया सह-प्रभारी एडवोकेट विश्व चक्षु ने इस निर्णय को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा जिस विभाग का मुख्य कार्य ही भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना और शासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, उसे ही आरटीआई के दायरे से बाहर कर देना यह दर्शाता है कि सरकार कुछ छिपाना चाहती
है। यह जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
आरटीआई लोकतंत्र में जवाबदेही तय करने का सबसे सशक्त माध्यम है। विजिलेंस जैसे संस्थानों को छूट देने से भ्रष्टाचार के मामलों की जांच ठंडे बस्ते में जा सकती है। प्रदेश की जनता को यह जानने का पूरा संवैधानिक अधिकार है कि भ्रष्टाचार के मामलों में क्या कार्रवाई हो रही है और जांच किस स्तर पर है।
इस तरह के गुप्त फैसलों से सरकार की कार्यप्रणाली पर जनता का अविश्वास बढ़ता है और लोकतांत्रिक मूल्य कमजोर होते हैं।
भाजपा प्रवक्ता ने सरकार से इस अधिसूचना को तुरंत वापस लेने और निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भ्रष्टाचार मिटाना सरकार की प्राथमिकता है, तो जांच एजेंसियों को अधिक पारदर्शी होना चाहिए न कि उन्हें जवाबदेही के दायरे से बाहर करना चाहिए।