बिलासपुर।
जिला मुख्यालय के बचत भवन में अभियोजन निदेशालय हिमाचल प्रदेश द्वारा मादक द्रव्य एवं मनोप्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act) के प्रावधानों पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया।
छठी राज्य स्तरीय एनकॉर्ड (NCORD) समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में जांच और साक्ष्यों की कानूनी विश्वसनीयता को सुदृढ़ बनाना था।
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने अधिकारियों को संबोधित किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने मादक पदार्थों की जब्ती के बाद अपनाई जाने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं जैसे सीलिंग (Sealing) जब्त माल को सुरक्षित सील करना।
नमूना संग्रहण (Sampling) सही तरीके से सैंपल लेना ताकि फॉरेंसिक जांच में बाधा न आए। निस्तारण (Disposal) विधिसम्मत तरीके से नशीले पदार्थों को नष्ट करने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की।
अभियोजन निदेशक संजीव कटोच और पुलिस अधीक्षक संदीप धवल ने बताया कि NDPS अधिनियम, 1985 के तहत साक्ष्यों का संरक्षण और दस्तावेजीकरण अत्यंत आवश्यक है। यदि इन प्रक्रियाओं का सही पालन किया जाए, तो अदालत में साक्ष्यों की विश्वसनीयता बनी रहती है, जिससे दोषियों को सजा दिलाने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि पारदर्शी जांच से न केवल न्याय प्रक्रिया तेज होती है, बल्कि जांच अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल नहीं उठते।
उपायुक्त राहुल कुमार ने जिले की स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि वर्तमान में जिले में NDPS अधिनियम के 570 मामले लंबित हैं। अब तक 51 मामलों का सफल निपटारा किया जा चुका है।
उन्होंने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय (Coordination) की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि भविष्य में मामलों के निपटान की गति को और बढ़ाया जा सके। इस अवसर पर संयुक्त निदेशक अभियोजन रणदीर परमार, जिला न्यायवादी बिलासपुर सी. एस. भाटिया सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।