हमीरपुर
हिमाचल प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए केंद्र सरकार द्वारा पंचायतों को भेजे गए बजट में वित्तीय हेराफेरी का आरोप लगाया है। राणा ने कहा कि प्रदेश सरकार नियमों को ताक पर रखकर 15वें वित्त आयोग की राशि पर 'डाका' डाल रही है।
पंचायतों के बजट पर सरकार का 'कब्जा'
बमसन टौणी देवी मंडल के प्रशिक्षण महाअभियान के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए राजेंद्र राणा ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ग्रामीण विकास के लिए करोड़ों रुपये का टाइड फंड (Tied Fund) सीधे पंचायतों के खातों में भेजती है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार दबाव बनाकर इस राशि को जबरन सरकारी खजाने में वापस ले रही है, जो पूरी तरह से असंवैधानिक है।
15वें वित्त आयोग की राशि पर केवल केंद्र और पंचायतों का अधिकार है। जब तक निर्वाचित प्रधान थे, सरकार इसे छू नहीं सकी, लेकिन अब प्रशासकों के माध्यम से करोड़ों रुपये की राशि जल शक्ति विभाग को स्थानांतरित कर दी गई है।
राजेंद्र राणा ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि विजिलेंस और एसीबी को आरटीआई (RTI) के दायरे से बाहर करना प्रदेश सरकार के डर को दर्शाता है। उन्होंने सवाल किया सरकार को आखिर किस बात का डर है कि उसे जांच एजेंसियों को आरटीआई से बाहर करना पड़ा? केंद्र द्वारा बनाए गए आरटीआई कानून में प्रदेश सरकार अपनी मनमर्जी से बदलाव कैसे कर सकती है?
अधिकारियों को चेतावनी
राणा ने कहा कि प्रदेश सरकार विकास के नाम पर शून्य है और केवल अपने 'मित्रों' पर खजाना लुटा रही है। उन्होंने उन अधिकारियों को भी आड़े हाथों लिया जो इन गलत कार्यों में सरकार का सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे अधिकारियों की पूरी जानकारी रखी जा रही है और आने वाले समय में उन्हें जवाब देना होगा।
विकास कार्य ठप्प
भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि हिमाचल में विकास कार्य पूरी तरह से ठप्प हो चुके हैं। सरकार के पास अपना कोई बजट नहीं है और वह केंद्र से मिलने वाली सहायता राशि को भी इधर-बधर करने में जुटी है। उन्होंने चेतावनी दी कि भाजपा सरकार की इन जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सड़क से सदन तक उग्र आंदोलन करेगी।