सीएम सुक्खू पर टिप्पणी को लेकर शिमला प्रदर्शन में दर्ज हुआ मामला; चुनावी हलफनामे, बैंक खाते, आयकर रिटर्न और संपत्तियों की जांच कर रही विजिलेंस
धर्मशाला से भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। आय से अधिक संपत्ति मामले के बाद अब उनके खिलाफ एक और FIR दर्ज की गई है। यह मामला मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ शिमला में हुए प्रदर्शन के दौरान की गई कथित टिप्पणी को लेकर दर्ज किया गया है।
वहीं, विधायक के खिलाफ प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं। शनिवार को हमीरपुर के भोरंज में महिला कांग्रेस ने सुधीर शर्मा के खिलाफ प्रदर्शन किया।
आय से अधिक संपत्ति मामले में विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने जांच का फोकस वित्तीय दस्तावेजों और कथित मनी ट्रेल पर केंद्रित कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी सुधीर शर्मा के चुनावी हलफनामों, आयकर रिटर्न, बैंकिंग रिकॉर्ड, जमीन और भवन से जुड़े दस्तावेजों के साथ-साथ निवेश और अन्य वित्तीय लेन-देन का मिलान कर रही है।
वित्तीय स्रोतों की भी जांच
एफआईआर से पहले की गई प्रारंभिक जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों को नियमित जांच का आधार बनाया गया है। जांच एजेंसी का फोकस केवल संपत्तियों की संख्या पर नहीं, बल्कि उनके वित्तीय स्रोतों पर भी है।
किसी लेन-देन या संपत्ति से संबंधित रिकॉर्ड अधूरा या संदिग्ध पाए जाने पर संबंधित विभागों से अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं।
20 प्रमुख वित्तीय बिंदुओं की सूची तैयार
विजिलेंस सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान करीब 20 प्रमुख वित्तीय बिंदुओं की सूची तैयार की गई है। इनमें आयकर रिटर्न, चुनावी हलफनामे, बैंक खाते, नकद और डिजिटल लेन-देन, निवेश, कृषि आय, वाहन, ऋण, कंपनियों या साझेदारी में हिस्सेदारी और पारिवारिक सदस्यों के नाम दर्ज संपत्तियां शामिल हैं।
इन सभी बिंदुओं का स्वतंत्र रूप से सत्यापन किया जा रहा है।
डिजिटल विश्लेषण के बाद अब दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन भी शुरू किया गया है। राजस्व रिकॉर्ड, रजिस्ट्री, बैंक दस्तावेज और अन्य अभिलेखों का मूल रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है।
विजिलेंस के अनुसार जांच कानून के दायरे में और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
सुधीर शर्मा ने कार्रवाई को बताया राजनीति से प्रेरित
सुधीर शर्मा पहले ही एफआईआर को राजनीति से प्रेरित बताते हुए आरोपों को खारिज कर चुके हैं। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में जांच एजेंसी की ओर से की जा रही वित्तीय दस्तावेजों की पड़ताल पर नजर बनी हुई है।
यदि वित्तीय रिकॉर्ड और घोषित आय के बीच कोई महत्वपूर्ण विसंगति सामने आती है तो जांच का दायरा आगे बढ़ सकता है। वहीं, यदि दस्तावेज घोषित आय और संपत्तियों के स्रोतों की पुष्टि करते हैं तो यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
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