शिमला
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में रेहड़ी-फड़ी लगाने वाले चंदन की मौत के बाद नगर निगम (MC) प्रशासन के खिलाफ माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। बीती 31 मई को नगर निगम की कथित कार्रवाई के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए चंदन ने अस्पताल के आईसीयू (ICU) में चार दिनों तक जिंदगी और मौत की जंग लड़ने के बाद दम तोड़ दिया।
इस घटना के बाद से स्थानीय रेहड़ी-फड़ी यूनियन और विभिन्न श्रमिक संगठनों में भारी नाराजगी और गहरा आक्रोश व्याप्त है।
सामान बचाने के प्रयास में घायल हुआ था चंदन: सीटू
मामले को लेकर 'सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस' (CITU) के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने बुधवार को नगर निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 31 मई को जब नगर निगम की टीम कार्रवाई करने पहुंची, तो चंदन घबराहट में अपना सामान और रेहड़ी बचाने का प्रयास कर रहा था।
इसी आपाधापी के दौरान वह संतुलन खोकर गिर गया और उसके सिर व शरीर पर गंभीर चोटें आईं। उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। सीटू ने इस दुखद मौत के लिए सीधे तौर पर कार्रवाई में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया है।
गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने और ₹25 लाख मुआवजे की मांग
श्रमिक संगठनों और यूनियन ने इस घटना को लेकर सरकार और प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं घटना के लिए जिम्मेदार नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) का मुकदमा दर्ज कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जाए।
पीड़ित परिवार को तुरंत 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। मृतक चंदन के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। चंदन के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का पूरा खर्च प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया जाए।
रोजी-रोटी कमाने वालों की सुरक्षा का सवाल
सीटू अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा, "यह मामला केवल एक व्यक्ति की दुखद मौत का नहीं है, बल्कि सड़कों पर ईमानदारी से रोजी-रोटी कमाने वाले गरीब और मेहनतकश लोगों की सुरक्षा और उनके सम्मान से जुड़ा हुआ है। प्रशासन की संवेदनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
यूनियन ने नगर निगम प्रशासन और राज्य सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द से जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो सीटू और रेहड़ी-फड़ी यूनियन मिलकर एक व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे।
इसके तहत शिमला नगर निगम के आयुक्त (Commissioner) और संयुक्त आयुक्त (Joint Commissioner) के कार्यालयों का घेराव किया जाएगा और शहर भर में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। इस घटना के बाद से शिमला में रेहड़ी-फड़ी कारोबारियों के अधिकारों और पुनर्वास नीति को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।