शिमला
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के ऐतिहासिक दीनदयाल उपाध्याय (रिपन) अस्पताल में एक नवजात बच्ची की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं।
छोटा शिमला क्षेत्र के एक दंपती की 45 दिन की मासूम बच्ची 'कियांशी' को अस्पताल में एक कथित जीवनरक्षक इंजेक्शन लगाया गया था, जिसके कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। परिजनों ने इस संबंध में पुलिस को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इंजेक्शन के बाद मुंह से निकला खून, IGMC में मृत घोषित
बच्ची के पिता दिलीप कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वे अपनी 45 दिन की बेटी को उपचार के लिए रिपन अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वहां चिकित्सकों/स्टाफ ने बच्ची को एक इंजेक्शन लगाया और कुछ देर निगरानी में रखने के बाद घर भेज दिया।
परिजनों का आरोप है कि इंजेक्शन लगने से पहले बच्ची की स्थिति बिल्कुल सामान्य थी, लेकिन घर पहुंचने के कुछ ही देर बाद अचानक उसकी हालत बिगड़ने लगी और मुंह से खून आने लगा। परिजन आनन-फानन में उसे लेकर आईजीएमसी (IGMC) अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया।
निष्पक्ष जांच की मांग; IGMC में पोस्टमार्टम, सैंपल जाएंगे PGI चंडीगढ़
मासूम की संदिग्ध मौत के बाद गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल पहुंचकर गहरा रोष व्यक्त किया। परिजनों की मांग पर पुलिस ने आईजीएमसी अस्पताल में मेडिकल बोर्ड के माध्यम से बच्ची के शव का पोस्टमार्टम करवाया है। इसके साथ ही मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए बच्ची के विसरा सैंपल जांच के लिए पीजीआई (PGI) चंडीगढ़ भेजे जा रहे हैं।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
मामले की पुष्टि करते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने रिपन अस्पताल से बच्ची के उपचार से जुड़े तमाम रिकॉर्ड और दस्तावेज़ अपने कब्जे में ले लिए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सा विशेषज्ञों की अंतिम राय मिलने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो पाएगा, जिसके आधार पर आगामी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने भी आश्वासन दिया है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त नियमानुसार कार्रवाई होगी।
क्या कहते हैं अस्पताल प्रशासन के अधिकारी?
मामला हमारे संज्ञान में आया है। जो इंजेक्शन बच्ची को लगाया गया था, वह नियमित चिकित्सा प्रक्रिया (रूटीन प्रोसेस) का हिस्सा है और वही इंजेक्शन अन्य बच्चों/मरीज को भी दिए गए हैं। अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पोस्टमार्टम और लैब रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।