शिमला।
खाड़ी देशों में जारी युद्ध और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को लेकर कांग्रेस के भीतर बयानों का विरोधाभास गहराता जा रहा है। कांग्रेस के दिग्गज नेता आनंद शर्मा द्वारा केंद्र की मोदी सरकार की विदेश नीति की सराहना किए जाने पर हरियाणा से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय अनुसूचित विभाग के संयोजक केशवराम बौद्ध ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
शिमला स्थित कांग्रेस कार्यालय में मीडिया से रूबरू होते हुए केशवराम बौद्ध ने स्पष्ट किया कि आनंद शर्मा का बयान संगठन का आधिकारिक स्टैंड नहीं है। उन्होंने कहा मुझे नहीं पता कि उन्होंने किस आधार पर यह बयान दिया है, लेकिन यह उनका व्यक्तिगत विचार हो सकता है। कांग्रेस पार्टी केंद्र की गलत नीतियों के खिलाफ मजबूती से खड़ी है।
सांसद बौद्ध ने प्रधानमंत्री मोदी के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि धरातल पर स्थिति इसके उलट है। एक तरफ केंद्र 'सब ठीक' होने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर आम जनता को समय पर रसोई गैस सिलेंडर तक नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि गलत नीतियों के कारण आने वाले समय में देश गंभीर आर्थिक संकट की चपेट में आ सकता है।
भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए बौद्ध ने आरोप लगाया कि देश का संविधान आज खतरे में है। उन्होंने राज्यसभा चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा हाल ही में हुई 68 राज्यसभा सीटों के चुनाव में संख्या बल न होने के बावजूद भाजपा ने निर्दलीय उम्मीदवार उतारे।
भाजपा विधायकों की खरीद-फरोख्त और धनबल के दम पर जीत सुनिश्चित करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के 64 राज्यसभा सांसद 'लूट-खसूट' और धनबल की राजनीति की देन हैं।
हिमाचल प्रदेश की राजनीति पर बात करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में समान अधिकार और समान विकास की नीति पर बेहतरीन कार्य हो रहा है।
इससे पूर्व, कांग्रेस कार्यालय में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं महान स्वतंत्रता सेनानी बाबू जगजीवन राम की जयंती पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। केशवराम बौद्ध ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि जगजीवन राम ने पार्टी लाइन से ऊपर उठकर मानवता, दलितों और पीड़ितों के उत्थान के लिए जो कार्य किए, वे आज भी प्रेरणादायी हैं।
केशवराम बौद्ध के इस बयान ने साफ कर दिया है कि आनंद शर्मा जैसे वरिष्ठ नेताओं की बयानबाजी के बावजूद, कांग्रेस का एक बड़ा धड़ा केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने के पक्ष में है। भाजपा पर लगाए गए 'लूट-खसूट' के आरोप आने वाले समय में हिमाचल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर सकते हैं।