शिमला।
हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित चेस्टर हिल (Chester Hill) मामले में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) के.के. पंत ने मुख्य सचिव संजय गुप्ता द्वारा पूर्व में जारी किए गए उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसमें बेनामी संपत्ति की जांच रोकने की बात कही गई थी।
इस फैसले के बाद अब इस मामले में बेनामी संपत्ति और धारा 118 के उल्लंघन की विस्तृत जांच का रास्ता साफ हो गया है।
6 दिसंबर 2025 को तत्कालीन राजस्व विभाग के प्रशासनिक सचिव का जिम्मा संभाल रहे मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने डीसी सोलन को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने एसडीएम सोलन ने अपनी जांच में हिमाचल प्रदेश मुजारियत एवं भू सुधार अधिनियम की धारा 118 और रेरा (RERA) एक्ट की अवहेलना की बात कही थी।
मुख्य सचिव ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि संबंधित पक्ष (हंसराज ठाकुर व अन्य) हिमाचल के कृषक हैं और उन्होंने कर्ज लेकर भूमि ली है। उन्होंने एसडीएम की रिपोर्ट को 'प्रथमदृष्टया सही नहीं' बताते हुए कार्रवाई को कृषकों के हितों के खिलाफ करार दिया था।
अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) के.के. पंत ने मामले का पुनरीक्षण (Review) करने के बाद मुख्य सचिव के आदेशों को दरकिनार कर दिया है। डीसी सोलन को जारी नए निर्देशों में कहा गया है।
इस प्रकरण में हिमाचल प्रदेश मुजारियत एवं भू सुधार अधिनियम की धारा 118 की अवहेलना का मामला बनाया जाए। संबंधित पार्टियों को सुनकर नियमानुसार उपयुक्त आदेश पारित किए जाएं।
मुख्य सचिव की ओर से जारी पिछले आदेशों को आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया गया है। चेस्टर हिल मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस मामले में वर्तमान मुख्य सचिव के खिलाफ छोटा शिमला थाना में पहले ही केस दर्ज है।
एसडीएम सोलन की मूल रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि राजपुर (कसौली) और परवाणू में खरीदी गई जमीनों में बेनामी संपत्ति के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है। मुख्य सचिव ने इसे 'मूलभूत अवधारणा की अनदेखी' बताया था, लेकिन अब राजस्व विभाग के नए आदेशों ने जांच को पुनर्जीवित कर दिया है।
सरकार के भीतर दो शीर्ष अधिकारियों (CS और ACS) के बीच आदेशों के इस टकराव ने चेस्टर हिल मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। अब गेंद डीसी सोलन के पाले में है, जिन्हें इस हाई-प्रोफाइल मामले में बेनामी संपत्तियों की परतें खोलनी होंगी।