शिमला I
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे दिव्यांगजनों का धैर्य मंगलवार को जवाब दे गया। पिछले 918 दिनों से लगातार आंदोलन कर रहे दृष्टिहीन युवाओं ने सचिवालय के बाहर अपनी शर्ट उतारकर सरकार के खिलाफ प्रचंड रोष प्रकट किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस और हल्की धक्का-मुक्की भी हुई।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राजेश ठाकुर ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें कोई नई नहीं हैं, बल्कि उनके संवैधानिक अधिकारों की बात है। विशेष भर्ती अभियान के तहत दिव्यांगों के खाली पड़े लगभग 1500 बैकलॉग पदों को एकमुश्त भरा जाए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार अन्य विभागों में नियुक्तियां कर रही है, लेकिन दिव्यांगों के कोटे को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। यहाँ तक कि पुरानी सुविधाएं भी छीनी जा रही हैं।
दृष्टिहीन संघ ने सरकार पर गंभीर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। राजेश ठाकुर ने बताया 6 अप्रैल को मुख्यमंत्री आवास (ओक ओवर) के घेराव के दौरान उन्हें सीएम के साथ बैठक का आश्वासन दिया गया था।
7 अप्रैल को जब मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी से संपर्क किया गया, तो कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। अधिकारियों द्वारा हाथ खड़े कर देने के बाद अब प्रदर्शनकारी सीधे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
आज का 'शर्ट उतारो प्रदर्शन' सरकार के लिए एक आखिरी चेतावनी की तरह था। संगठन ने दो टूक शब्दों में अल्टीमेटम दिया है यदि आज मुख्यमंत्री के साथ बैठक का लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तो आंदोलन बेहद उग्र होगा। अगले चरण में हम हाथों में पेट्रोल की बोतल और लाइटर लेकर मुख्यमंत्री आवास 'ओक ओवर' का घेराव करेंगे और प्रदेशव्यापी चक्का जाम किया जाएगा।
सचिवालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात था। जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने सचिवालय की ओर बढ़ने की कोशिश की, पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस बीच दृष्टिहीनों और सुरक्षाकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे सड़कों पर ठोकरें खाने को मजबूर हैं और अब उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा है।
शिमला की सड़कों पर अर्ध-नग्न अवस्था में प्रदर्शन कर रहे ये दृष्टिहीन युवा हिमाचल की वर्तमान व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस 918 दिनों से चले आ रहे गतिरोध को खत्म करने के लिए कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं।