ऊना में कांग्रेस-भाजपा के बीच बयानबाजी तेज, पूर्व विधायक ने कहा- आरोप बेबुनियाद, दोनों मामलों की जांच से सामने आएगी सच्चाई
राम मंदिर चंदा और पीरनिगाह मंदिर निधि को लेकर ऊना में कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं ऊना के पूर्व विधायक सतपाल रायजादा ने मंगलवार को भाजपा नेताओं के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि जब उन्होंने राम मंदिर में कथित चंदा,
सोना, चांदी और अन्य धार्मिक सामग्री की चोरी का मुद्दा उठाया तो भाजपा ने जवाब देने के बजाय पीरनिगाह मंदिर की निधि को लेकर उन पर आरोप लगाने शुरू कर दिए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ भी कोई आरोप है तो उसकी भी जांच कराई जाए, ताकि जनता के सामने पूरी सच्चाई आ सके।
प्रशासनिक कार्यकाल में डेढ़ करोड़ से अधिक राशि जमा होने का दावा
पत्रकारों से बातचीत में सतपाल रायजादा ने कहा कि पंचायतों के भंग होने के बाद पीरनिगाह मंदिर का प्रभार प्रशासन के पास चला गया था। उस समय मंदिर निधि में करीब 30 लाख रुपये जमा थे, जो पहले पांच वर्षों में एकत्र हुए थे।
उन्होंने दावा किया कि प्रशासन ने पुरानी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया और पेंशन, आर्थिक सहायता सहित सभी नियमित खर्च पहले की तरह जारी रहे। इसके बावजूद मात्र तीन महीने में मंदिर निधि में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हुई।
'तथ्यों के साथ बात करे भाजपा'
रायजादा ने सवाल उठाया कि जब पांच वर्षों में केवल 30 लाख रुपये जमा हुए और प्रशासनिक कार्यकाल के तीन महीनों में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हुई, तो उन पर आरोप लगाने का आधार क्या है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय तथ्यों के आधार पर बात करनी चाहिए।
दोनों मामलों की जांच की मांग
पूर्व विधायक ने कहा कि यदि भाजपा को प्रशासनिक कार्यकाल में किसी प्रकार की अनियमितता का संदेह है तो वह स्वयं पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हैं। उन्होंने कहा कि वह किसी भी जांच से नहीं डरते और चाहते हैं कि पीरनिगाह मंदिर निधि और राम मंदिर चंदा, दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच हो ताकि जनता के सामने सच्चाई आ सके।
भाजपा पर लगाए पलटवार के आरोप
सतपाल रायजादा ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि राम मंदिर चंदा मामले में जवाब देने के बजाय जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि निष्पक्ष जांच होने पर यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि मंदिर निधि का पैसा कहां खर्च हुआ और पूरे मामले में किसकी क्या भूमिका रही।
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