मंडी।
जिस योजना ने गरीब को 5 लाख तक का सहारा दिया, उसी हिमकेयर को बंद कर सरकार ने जनता को बीमारी और कर्ज के अंधेरे में धकेलने का काम किया है। राकेश जम्बाल ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा हिमकेयर योजना को बंद करने का निर्णय प्रदेश के गरीब,
मध्यम वर्ग और जरूरतमंद परिवारों के साथ खुला अन्याय है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि प्रदेश के लगभग 8.5 लाख परिवारों के लिए जीवन बचाने वाली संजीवनी थी, जिसके माध्यम से हर परिवार को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा था।
राकेश जम्बाल ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि अगर हिमकेयर योजना में गड़बड़ी थी तो मुख्यमंत्री अब तक कहां सोए थे? क्या सरकार को साढ़े तीन साल तक कुछ दिखाई नहीं दिया?
या फिर अब, जब अपनी नाकामियों का जवाब देने का समय आया है, तो जनता को भ्रमित करने के लिए नई-नई कहानियां गढ़ी जा रही हैं? उन्होंने कहा कि बजट सत्र के बीच इस तरह का ऐलान करना दर्शाता है कि सरकार के पास कोई ठोस नीति नहीं, बल्कि केवल राजनीतिक बचाव की रणनीति है।
उन्होंने कहा कि सरकार खुद स्वीकार कर रही है कि पिछले 6 वर्षों में इस योजना पर लगभग 1100 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जबकि पंजीकरण और प्रीमियम के माध्यम से जनता से हर साल केवल 13 से 18 करोड़ रुपये ही एकत्र हुए।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि हिमकेयर का पैसा आखिर कहां गया? सरकार को पारदर्शिता के साथ जवाब देना चाहिए, केवल “गड़बड़ी” का आरोप लगाकर अपनी जिम्मेदारी से भागना उचित नहीं है।
रकेश जम्बाल ने सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर योजना में खामियां थीं और उसे बंद करने का विचार पहले से था, तो फिर लाखों लोगों से रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल के नाम पर पैसा क्यों वसूला गया?
पहले जहां कार्ड 1 साल के लिए बनता था और अब 3 साल के लिए किया गया, वहां भी शुल्क लिया गया—क्या यह गरीबों से पैसे ऐंठने का एक सुनियोजित तरीका नहीं है? सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जनता से वसूले गए इस पैसे का हिसाब कहां है।
उन्होंने कहा कि आज प्रदेश की वास्तविकता बेहद चिंताजनक है। लोग इलाज के लिए मंगलसूत्र बेचने को मजबूर हैं, अपनी जमीन बेच रहे हैं, या फिर गंभीर बीमारियों में बिना इलाज के चुपचाप दम तोड़ने को मजबूर हैं। ऐसे समय में हिमकेयर जैसी जीवनदायिनी योजना को बंद करना न केवल असंवेदनशीलता है, बल्कि यह सरकार की गरीब विरोधी मानसिकता को उजागर करता है।
राकेश ने आगे कहा कि सरकार यह भी स्पष्ट करे कि जब अफसर वही हैं, प्रशासनिक ढांचा वही है, तो अचानक इतनी बड़ी खामियां कैसे सामने आ गईं? क्या सरकार की प्रशासनिक समझ इतनी कमजोर है कि एक वर्ष के भीतर योजना की वास्तविक स्थिति का आकलन नहीं कर सकी? अब जब सरकार अपने कार्यकाल के अंतिम चरण में है, तो पूर्व सरकार पर आरोप लगाकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार पर पहले ही 600 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी का दबाव है और इसी आर्थिक बोझ के चलते योजनाओं को बंद करने का रास्ता अपनाया जा रहा है।
लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि इस निर्णय की सबसे बड़ी कीमत प्रदेश का गरीब और जरूरतमंद वर्ग चुका रहा है। राकेश जमवाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने तुरंत हिमकेयर योजना को बहाल नहीं किया और गरीबों को राहत देने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो भाजपा इस जनविरोधी फैसले के खिलाफ सड़कों से लेकर सदन तक व्यापक आंदोलन करेगी और
सरकार को हर मोर्चे पर घेरने का काम करेगी।