सिरमौर।
जहां आजकल छोटी-छोटी पंचायतों के चुनावों में लाखों का खर्च, आपसी रंजिश और कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है, वहीं जिला सिरमौर की ग्राम पंचायत टटियाना ने एक बार फिर मिसाल कायम की है।
रविवार को शाटी पाशी का चौंतरा में आयोजित एक विशेष बैठक के दौरान ग्रामीणों ने बिना किसी मतदान या प्रचार के, सर्वसम्मति से अपने प्रतिनिधियों का चयन कर पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
2020 में शुरू हुई थी यह अनूठी परंपरा
टटियाना गांव में इस लोकतांत्रिक सादगी की नींव वर्ष 2020 में गांव के बुद्धिजीवियों और वरिष्ठ नागरिकों द्वारा रखी गई थी। गांव की एकता को बनाए रखने के लिए यहां के चार बड़े परिवारों से नामित प्रतिनिधियों के नाम पर्चियों में डाले जाते हैं और फिर निष्पक्ष तरीके से नेतृत्व का चयन किया जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य चुनावों में होने वाले अनावश्यक धन के खर्च को रोकना और चुनावी रंजिश के कारण गांवों में पैदा होने वाली कड़वाहट को समाप्त करना है।
शिक्षित युवाओं के हाथों में सौंपी कमान
इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज गांव की पंचायत के लिए नई टीम का चयन किया गया, जिसमें उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को प्राथमिकता दी गई है:
प्रधान: पूनम शर्मा (B.Sc., B.Ed.)
उप प्रधान: दाता राम शर्मा (12+2)
BDC सदस्य: प्रियंका शर्मा (Graduation, JBT)
पूरी चयन प्रक्रिया के दौरान गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा। ग्रामीणों का मानना है कि शिक्षित प्रतिनिधियों के आने से विकास कार्यों में तेजी आएगी और गांव की समस्याओं का समाधान बेहतर तरीके से हो सकेगा।
भाईचारे का संदेश: पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा
स्थानीय निवासियों का कहना है कि टटियाना गांव ने यह साबित कर दिया है कि आपसी विश्वास और समझ के बल पर भी मजबूत नेतृत्व चुना जा सकता है। इस पहल की सराहना करते हुए आसपास की पंचायतों के लोग भी इसे 'आदर्श चुनाव प्रणाली' मान रहे हैं। बिना किसी शोर-शराबे और विवाद के संपन्न हुई इस प्रक्रिया ने संदेश दिया है कि सामाजिक एकता ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है।