रामपुर।
महात्मा गांधी मेमोरियल चिकित्सा संस्थान खनेरी (रामपुर) के नर्सिंग हॉस्टल में टीबी के मामलों को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही 19 छात्राओं के संक्रमित होने की खबरें पूरी तरह निराधार हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने इस पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि हॉस्टल में केवल 2 छात्राएं ही टीबी पॉजिटिव पाई गई हैं, जिनका उपचार तय प्रोटोकॉल के तहत किया जा रहा है। 19 की संख्या को विभाग ने भ्रामक और गलत बताया है।
क्या है सच्चाई? विभाग ने जारी किया डेटा
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पहली छात्रा 9 जुलाई 2025 को संक्रमित पाई गई थी, जो अब पूर्ण रूप से स्वस्थ हो चुकी है। वहीं, दूसरी छात्रा 9 दिसंबर 2025 को पॉजिटिव आई थी, जिसका वर्तमान में नियमित इलाज चल रहा है।
सोशल मीडिया पर जिन 19 छात्राओं का जिक्र किया जा रहा है, उनमें से 17 छात्राएं दरअसल संक्रमित नहीं हैं, बल्कि वे इन दो मरीजों के संपर्क (Close Contacts) में आने के कारण एहतियाती तौर पर 'टीपीटी' (Tuberculosis Preventive Treatment) ले रही हैं। यह उपचार भारत सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार भविष्य में संक्रमण से बचाव के लिए दिया जाता है।
सभी प्रोटोकॉल का पालन, MDR-TB का कोई मामला नहीं
विभाग ने स्पष्ट किया कि संस्थान में एमडीआर-टीबी (MDR-TB) का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। टीबी से ग्रसित दोनों छात्राओं को 'निक्षय पोषण योजना' के तहत न केवल आर्थिक सहायता दी गई है, बल्कि निक्षय मित्रों के माध्यम से उन्हें पोषण किट भी उपलब्ध कराई जा रही है।
राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत क्लोज कॉन्टैक्ट्स की स्क्रीनिंग और सुरक्षा के प्रभावी कदम उठाए गए हैं।
80 छात्राओं का हुआ विशेष एक्स-रे कैंप
भविष्य की सुरक्षा और संक्रमण की रोकथाम सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 6 मार्च 2026 को नर्सिंग हॉस्टल में एक विशेष 'एक्टिव केस फाइंडिंग' कैंप आयोजित किया।
इस दौरान 80 छात्राओं की हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन के माध्यम से जांच की गई और टीबी के लक्षणों की गहनता से पड़ताल की गई। स्वास्थ्य विभाग ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें।