बिलासपुर I
समाजसेवी संस्था 'संस्कार सोसायटी' का वार्षिक साधारण अधिवेशन रविवार को पट्टा स्थित उत्सव महल में हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। इस अधिवेशन में संस्था की साल भर की गतिविधियों की समीक्षा की गई और भविष्य की कार्ययोजनाओं पर विस्तार से मंथन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से संस्था के संस्थापक महेंद्र धर्माणी ने शिरकत की और युवाओं व समाज के उत्थान के लिए अपना दृष्टिकोण साझा किया।
संस्कार और सरोकार का केंद्र बनें गांव
अधिवेशन को संबोधित करते हुए महेंद्र धर्माणी ने कहा कि संस्था का मुख्य ध्येय गांवों को संस्कार और सरोकार का केंद्र बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्ष 2008 से संस्था निरंतर इस दिशा में कार्य कर रही है कि नई पीढ़ी संस्कारवान बने।
धर्माणी ने कहा, "समाज में केवल सदस्य बनना काफी नहीं है, बल्कि समाज के उत्थान के लिए सक्रिय सुझाव देना और उन्हें धरातल पर लागू करना अनिवार्य है। हमारी एक छोटी सी कोशिश से यदि कोई बच्चा शिक्षित होता है या कोई व्यक्ति नशे की गर्त से बाहर निकलता है, तो यही संस्था की सबसे बड़ी उपलब्धि है।"
नशामुक्त समाज और आध्यात्मिक शिक्षा पर जोर
धर्माणी ने स्पष्ट किया कि बच्चों की शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य और खेल गतिविधियां संस्था की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में गांवों में नशा और 'चिट्टा' एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
इससे निपटने के लिए बच्चों के लिए गांव स्तर पर बौद्धिक और शारीरिक गतिविधियां आयोजित करना आवश्यक है। संस्था बच्चों को सनातन संस्कृति से जोड़ने के लिए 'गीता प्रश्नोत्तरी' जैसे कार्यक्रम आयोजित कर रही है ताकि युवाओं में आध्यात्मिक चेतना जागृत हो सके।
चुनावी एजेंडे में शामिल हों सामाजिक मुद्दे
अधिवेशन के दौरान यह निर्णय लिया गया कि संस्था आगामी पंचायत व नगर परिषद चुनावों के प्रत्याशियों से आग्रह करेगी कि वे अपने चुनावी एजेंडे में नशामुक्त समाज, जल संरक्षण और स्वच्छता जैसे गंभीर विषयों को शामिल करें।
बैठक में कई महत्वपूर्ण सुझाव भी आए, जिनमें गौ सेवा और संरक्षण पर कार्य करना, 'घुमारवीं अगेंस्ट चिट्ठा' अभियान को और अधिक तेज करना, बच्चों में नैतिक मूल्यों के विकास के लिए विशेष आध्यात्मिक शिविर लगाना। अधिवेशन के अंत में संस्था के सदस्यों ने समाज के प्रति अपनी जवाबदेही निभाने और विकास की नई इबारत लिखने का संकल्प लिया।