नूरपुर।
हिमाचल प्रदेश के इतिहास का सबसे काला दिन माना जाने वाला 4 अप्रैल, 1905 का कांगड़ा भूकंप, आज भी प्रदेशवासियों के जहन में खौफ पैदा करता है। इस विनाशकारी भूकंप की 121वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर नूरपुर विधानसभा क्षेत्र की पंचायत सुलयाली में NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल) की 14वीं बटालियन द्वारा एक भव्य मॉक ड्रिल और जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
मॉक ड्रिल: जब सुलयाली में गूँजे आपदा बचाव के मंत्र
एनडीआरएफ की टीम ने अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीकी कौशल के साथ स्थानीय लोगों को यह सिखाया कि आपदा केवल बताकर नहीं आती, लेकिन तैयारी से उससे लड़ा जा सकता है। टीम ने प्रदर्शन किया कि भूकंप आने पर 'Drop, Cover and Hold' की तकनीक का उपयोग कैसे करें।
मलबे में फंसे व्यक्ति को निकालने और उसे प्राथमिक उपचार देने का लाइव डेमो दिया गया। मॉक ड्रिल में दिखाया गया कि स्ट्रेचर न होने की स्थिति में घरेलू वस्तुओं का उपयोग करके घायल को सुरक्षित एम्बुलेंस तक कैसे पहुँचाया जाए। बरसात के मौसम को देखते हुए बाढ़ और भूस्खलन के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों की भी जानकारी दी गई।
प्रशासन और NDRF का साझा प्रयास
NDRF 14वीं बटालियन के इंस्पेक्टर दीपक सिंह जसवाल ने कहा कि जिला प्रशासन के निर्देशानुसार यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। उन्होंने 1905 की त्रासदी का उल्लेख करते हुए बताया इतिहास हमें सिखाता है कि हम आपदा को रोक नहीं सकते, लेकिन अपनी सतर्कता से जान-माल के नुकसान को न्यूनतम जरूर कर सकते हैं।
आज के समय में हर नागरिक का 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' (प्रथम सहायक) होना आवश्यक है।
स्थानीय भागीदारी और प्रतिक्रिया
इस शिविर में केवल सुलयाली ही नहीं, बल्कि आसपास की पंचायतों—सदवां, गुरचाल और ठेहड़ सिम्बली—के ग्रामीणों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
पंचायत सचिव रजिंद्र: उन्होंने बताया कि इस तरह के प्रशिक्षण ग्रामीण स्तर पर बहुत कम मिल पाते हैं, जिससे लोग अक्सर आपात स्थिति में घबरा जाते हैं। यह कार्यक्रम बेहद सफल रहा।
स्थानीय निवासी कर्ण: उन्होंने टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा, "हमें आज पता चला कि छोटी-छोटी सावधानियां कैसे जान बचा सकती हैं। अब हम आपदा के समय घबराने के बजाय सही निर्णय लेने में सक्षम होंगे।