धर्मशाला
जिला कांगड़ा के सभी न्यायालयों में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण शिमला के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर की अध्यक्षता तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कांगड़ा के अध्यक्ष न्यायमूर्ति चिराग भानु सिंह के कुशल मार्गदर्शन
में यह प्रक्रिया संपन्न हुई। इस अदालत का मुख्य उद्देश्य आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में लंबे समय से लंबित मामलों का समाधान करना था।
विभिन्न श्रेणियों के मामलों पर हुई सुनवाई
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कांगड़ा द्वारा आयोजित इस लोक अदालत में न्याय के विभिन्न पहलुओं से जुड़े मामलों को सुना गया। इनमें मुख्य रूप से एन.आई. एक्ट (चेक बाउंस), धन वसूली और बैंक ऋण।
धारा 125 के तहत भरण-पोषण, वैवाहिक विवाद और आपराधिक कंपाउंडेबल मामले। बिजली और पानी के बिलों से संबंधित विवाद। श्रम विवाद, मोटर दुर्घटना दावा (MACT), भूमि अधिग्रहण, राजस्व और अन्य सिविल मामले।
सांख्यिकी: सफलता के आंकड़े
लोक अदालत में न्याय की गति को तेज करते हुए हजारों परिवारों को राहत प्रदान की गई सुनवाई के लिए कुल 10,232 मामले रखे गए थे। आपसी समझौते के माध्यम से 5,429 मामलों का मौके पर ही निपटारा किया गया। इन मामलों के समाधान के रूप में कुल 5,07,58,589 रुपये (5 करोड़ 7 लाख से अधिक) की सेटलमेंट राशि के अवार्ड पारित किए गए।
सुलह से न्याय की ओर एक कदम
न्यायमूर्ति चिराग भानु सिंह ने बताया कि लोक अदालत न केवल न्यायालयों पर बढ़ते बोझ को कम करती है, बल्कि पक्षकारों के बीच कटुता को समाप्त कर उन्हें भविष्य की कानूनी लंबी लड़ाई से भी बचाती है।
लोक अदालत के माध्यम से होने वाले फैसले अंतिम होते हैं और इनके खिलाफ कोई अपील नहीं होती, जिससे विवाद का स्थायी अंत हो जाता है। इस आयोजन में जिला के विभिन्न खंडों के न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और बैंक अधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।