शिमला।
हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकायों की चुनावी गहमागहमी के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने तबादलों (Transfers) को लेकर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने एक नई गाइडलाइन जारी करते हुए सभी सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 31 मई तक कर्मचारियों के तबादलों से संबंधित कोई भी फाइल आयोग को न भेजी जाए।
आयोग का मानना है कि थोक में आ रहे तबादला प्रस्तावों के कारण चुनाव जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में बाधा आ रही है।
चुनावी कामकाज हो रहा प्रभावित
वर्तमान में राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत और नगर निकायों के चुनाव की तैयारियों में पूरी तरह व्यस्त है। आयोग ने कहा है कि विभिन्न विभागों द्वारा हर दिन बड़ी संख्या में तबादलों की फाइलें अनुमोदन के लिए भेजी जा रही हैं, जिससे प्रशासनिक अमले पर अनावश्यक दबाव बढ़ रहा है।
इन फाइलों की जांच-पड़ताल और प्रक्रिया में लगने वाले समय के कारण चुनावी तैयारियों की गति धीमी हो रही है।
इन अधिकारियों को जारी हुए कड़े निर्देश
आयोग ने प्रदेश के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और सरकारी उपक्रमों के प्रमुखों को निर्देश जारी किए हैं कि वे तबादलों के प्रस्तावों पर रोक लगाएं। आयोग ने साफ किया है कि जब तक कोई मामला अत्यंत अपरिहार्य (Urgent) न हो या सीधे तौर पर चुनाव कार्य से न जुड़ा हो, तब तक किसी भी कर्मचारी या अधिकारी की फाइल स्वीकृति के लिए न भेजी जाए।
तबादला प्रस्तावों की बाढ़ से आयोग परेशान
सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में कई विभागों ने सैकड़ों अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों के प्रस्ताव आयोग को भेजे थे। इन प्रस्तावों की कानूनी और चुनाव आचार संहिता के नजरिए से जांच करने में आयोग का काफी कीमती समय बर्बाद हो रहा था। इसी को देखते हुए आयोग ने 31 मई तक की समय सीमा तय कर तबादलों पर लगभग विराम लगा दिया है।
आचार संहिता और सुचारू व्यवस्था पर जोर
निर्वाचन आयोग का यह कदम चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और सुचारू व्यवस्था बनाए रखने के लिए अहम माना जा रहा है। आयोग चाहता है कि पूरा प्रशासनिक तंत्र केवल चुनाव कार्यों पर केंद्रित रहे ताकि मतदाता सूचियों, मतदान केंद्रों और अन्य चुनावी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा किया जा सके।
31 मई के बाद ही विभागों द्वारा सामान्य तबादला प्रक्रियाओं पर विचार किए जाने की संभावना है।