मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में मंडी जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्राकृतिक खेती के माध्यम से एक नई मजबूती मिल रही है। राज्य सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती से उत्पादित अनाज पर देश का सबसे अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित करने के फैसले ने किसानों के भीतर नया उत्साह जगाया है।
इसी प्रोत्साहन का परिणाम है कि पिछले तीन वर्षों में जिले में 23,291 नए किसान इस मुहिम से जुड़े हैं, जिससे वर्तमान में प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों की कुल संख्या 48,380 तक पहुंच गई है। यह बदलाव न केवल पर्यावरण की सुरक्षा कर रहा है, बल्कि 'सुक्खू सरकार' के प्रयासों से किसानों को उनकी मेहनत का उचित सम्मान और दाम भी सुनिश्चित कर रहा है।
MSP में ऐतिहासिक वृद्धि और महिला सशक्तिकरण
किसानों की खुशहाली का सबसे बड़ा कारण गेहूं, मक्की और हल्दी जैसी फसलों के समर्थन मूल्य में की गई भारी वृद्धि है। इस वर्ष गेहूं का दाम 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये और हल्दी का दाम 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलो किया गया है, जबकि अदरक के लिए पहली बार 30 रुपये प्रति किलो का मूल्य घोषित हुआ है।
सरकाघाट, सुंदरनगर और करसोग की महिला किसानों—नीलम, प्रेमलता और गीता—का मानना है कि इस पहल से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। पहली बार किसान अपनी उपज को लेकर आत्मविश्वास महसूस कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें अब अपनी फसलों के लिए बाजार में भटकने की जरूरत नहीं है और बिचौलियों के बजाय सीधा लाभ उन तक पहुंच रहा है।
पारदर्शी भुगतान प्रणाली और बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण
कृषि विभाग (आत्मा) के माध्यम से सरकार ने मंडी जिले में भुगतान और खरीद की एक पारदर्शी व्यवस्था खड़ी की है। जिले में मंडी सदर, पधर और सुंदरनगर सहित छह खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां से सीधे किसानों के बैंक खातों में अब तक लगभग 78 लाख रुपये हस्तांतरित किए जा चुके हैं।
इसके अतिरिक्त, पहाड़ी क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार गेहूं की ढुलाई के लिए 200 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त भुगतान भी कर रही है। उपायुक्त अपूर्व देवगन के अनुसार, समय पर लाभ हस्तांतरण और खरीद केंद्रों की उपलब्धता ने इस योजना को धरातल पर सफल बनाया है,
जिससे अन्य किसान भी रसायनों को छोड़ प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।