हमीरपुर
हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में 23 मार्च को अपने जन्म के कुछ ही घंटों बाद माता-पिता द्वारा छोड़ी गई नवजात बच्ची को अब नया ठिकाना मिल गया है। जिला बाल संरक्षण समिति ने बच्ची के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उसे शिमला के टूटीकंडी स्थित बाल संरक्षण केंद्र भेजने का निर्णय लिया है।
यह फैसला तब लिया गया जब विभागीय जांच के दौरान बुलाए जाने पर बच्ची के जैविक माता-पिता ने उसके पालन-पोषण में असमर्थता जताते हुए अपना हाथ पीछे खींच लिया। अब इस बेसहारा बच्ची की जिम्मेदारी सरकार और बाल संरक्षण केंद्र के अनुभवी चिकित्सक व केयर टेकर उठाएंगे।
संक्रमण को दी मात, स्वस्थ होकर टूटीकंडी पहुंची नन्ही जान
अस्पताल में लावारिस छोड़े जाने के बाद बच्ची गंभीर संक्रमण (इंफेक्शन) का शिकार हो गई थी, जिसके चलते उसे बेहतर इलाज के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। वहां डॉक्टरों की कड़ी मेहनत और उचित उपचार के बाद बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ है।
राहत की बात यह है कि जन्म के समय जिस बच्ची का वजन मात्र 1600 ग्राम था, वह अब 18 दिनों के भीतर बढ़कर 2 किलो से अधिक हो गया है। स्वास्थ्य में निरंतर सुधार को देखते हुए प्रशासन ने उसे विधिवत रूप से बाल संरक्षण केंद्र में शिफ्ट कर दिया है, ताकि उसे पारिवारिक माहौल और बेहतर पोषण मिल सके।
दत्तक ग्रहण (Adoption) के लिए शुरू होगी कानूनी प्रक्रिया
जिला प्रशासन और बाल संरक्षण विभाग अब बच्ची के सुरक्षित भविष्य के लिए उसे दत्तक ग्रहण यानी एडॉप्शन के लिए तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। जब तक बच्ची के लिए कोई उपयुक्त और संवेदनशील परिवार नहीं मिल जाता, तब तक वह टूटीकंडी केंद्र में ही रहेगी।
वहां तैनात टीम उसकी सेहत, खान-पान और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखेगी। यह मामला समाज की संवेदनशीलता और सरकारी तंत्र की मुस्तैदी को दर्शाता है, जहाँ अपनों द्वारा छोड़े जाने के बावजूद एक नन्ही जान को बचाने और संवारने के लिए प्रशासन पूरी गंभीरता से डटा रहा।