हिमाचल प्रदेश के बागवानी क्षेत्रों में बारिश के दौरान सड़कें टूटने और परिवहन बाधित होने की समस्या आम है। ऐसे में शिमला जिले के कोटखाई क्षेत्र के ग्लेहा गांव के बागवान देवेंद्र सिंह ने अपने स्तर पर ऐसा समाधान तैयार किया है, जो अब अन्य बागवानों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।
गांव में सड़क टूटने के बाद उन्होंने करीब 300 मीटर लंबी तार स्पैन (रोपवे) लगाकर अपने बगीचों को मुख्य सड़क से जोड़ दिया। अब सेब की पेटियां ट्रॉली सिस्टम के माध्यम से हवा में लटककर कुछ ही मिनटों में सड़क तक पहुंच रही हैं।
सड़क टूटी तो बागवान ने खुद बनाया रास्ता
जिला शिमला की कोटखाई तहसील की पंचायत चमैन के ग्लेहा गांव में ढलानों पर सेब के बगीचे हैं। बगीचों के बीच गहरा नाला और खराब सड़क होने के कारण सेब सीजन में बागवानों को भारी परेशानी उठानी पड़ती थी।
सेब तुड़ान शुरू होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती फसल को सड़क तक पहुंचाने की थी। सरकारी मदद का इंतजार करने के बजाय देवेंद्र सिंह ने अपने स्तर पर समाधान निकालते हुए तार स्पैन स्थापित कर दी।
दो लाख रुपये की लागत से तैयार की तार स्पैन
देवेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने करीब दो लाख रुपये खर्च कर 300 मीटर लंबी तार स्पैन लगाई है। यह रोपवे उनके गोदाम को सीधे मुख्य सड़क से जोड़ती है।
उनके बगीचे में हर साल करीब 2500 से 3000 सेब पेटियों का उत्पादन होता है। पहले मजदूरों की मदद से खड़ी चढ़ाई और बरसाती नालों को पार कर सेब की पेटियां सड़क तक पहुंचानी पड़ती थीं। बारिश के दौरान सड़क टूटने से यह काम कई बार घंटों तक प्रभावित हो जाता था।
अब डीजल इंजन से चलने वाली तार स्पैन के जरिए एक बार में चार से छह पेटियां कुछ ही मिनटों में सड़क तक पहुंच जाती हैं।
खराब मौसम में भी समय पर मंडी पहुंच रही फसल
देवेंद्र सिंह का कहना है कि वर्षों तक सड़क और पुल की समस्या के समाधान का इंतजार किया, लेकिन हर मानसून में हालात फिर खराब हो जाते थे। आखिरकार उन्होंने अपने खर्च पर यह व्यवस्था तैयार करने का निर्णय लिया।
इस पहल से खराब मौसम में भी सेब की फसल समय पर सड़क तक पहुंच रही है और मंडी तक पहुंचाने में आसानी हो रही है।
हिमाचल के अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ रहा रुझान
ग्लेहा गांव की यह पहल अब दूसरे बागवानों के लिए भी उदाहरण बन रही है। बारिश के दौरान सड़क, पुल और पुलियों के क्षतिग्रस्त होने से परेशान कई क्षेत्रों के लोग अब तार स्पैन जैसे विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।
जिला शिमला की पंचायत क्यार में भी ग्रामीणों ने सामूहिक प्रयास से तार स्पैन लगाने का काम शुरू किया है। इसके लिए स्थानीय प्रतिनिधि मदन लाल वर्मा ने बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी से आर्थिक सहायता दिलाने में भूमिका निभाई है।
इसके अलावा ठियोग तहसील की पंचायत कलींड में भी कई बागवान अपने स्तर पर तार स्पैन लगा चुके हैं।
बढ़ी तार स्पैन की मांग
पठानकोट से तार स्पैन की आपूर्ति करने वाले नवीन गुप्ता के अनुसार हिमाचल से लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं। स्थानीय विक्रेता वरुण मल्होत्रा ने बताया कि इस बार मांग पहले की तुलना में काफी बढ़ी है।
तार स्पैन इंस्टॉलर रामलाल शर्मा के अनुसार एक तार स्पैन लगाने में सामान्य तौर पर 10 से 15 दिन का समय लगता है। हाल ही में मूलकोटी क्षेत्र में भी तार स्पैन स्थापित की गई है।
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